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डॉक्टर की सलाह: गर्मी में बढ़ गए फंगल और एलर्जी के मरीज, बच्चे भी हो रहे इसका शिकार

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 23 Jun 2022 01:21 PM IST
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सार

डॉ. एनके वर्मा ने बताया कि इस वक्त फंगल इंफेक्शन के मरीज ज्यादा है। फंगल इंफेक्शन शरीर के पसीना रुकने वाले स्थानों पर अधिक होता है, जैसे अंडर आर्म्स, जांघ, छाती का निचला भाग और उंगलियों के बीच में।

Fungal and allergy patients increased in summer
सांकेतिक तस्वीर।
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विस्तार

गर्मी के बढ़ने के साथ ही फंगल इंफेक्शन और एलर्जी के मरीज अचानक बढ़ गए हैं। जून माह में चर्म रोग विभाग की ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में 50 फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है। जिला अस्पताल की ओपीडी में इस वक्त प्रतिदिन 300 से अधिक त्वचा रोगी इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। यही हाल बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एम्स के चर्म रोग विभाग की ओपीडी का भी है।

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जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. एनके वर्मा ने बताया कि तापमान बढ़ने की वजह से यह समस्याएं हो रहीं हैं। इस वजह से दाद, खाज, खुजली, फोड़ा, फुंसी, फंगल इंफेक्शन और त्वचा पर एलर्जी के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। त्वचा रोग गर्मी आने पर बढ़ जाता है। बताया कि अप्रैल और मई माह में 100 से 150 मरीज आ रहे थे, लेकिन जून माह में त्वचा रोग से संबंधित 300 से अधिक मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं।
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बताया कि तापमान में जैसे-जैसे बढ़ोतरी होगी वैसे ही सूर्य से होने वाली एलर्जी (फोटोडर्माटाइटिस) के रोगी बढ़ेंगे। इसमें चेहरा लाल हो जाता है। इसके अलावा शरीर पर लाल रंग के दाने निकल जाते है। सूर्य की रोशनी में समाहित अल्ट्रा वॉयलेट किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं। गर्मी में इसका प्रभाव काफी ज्यादा बढ़ जाता है।
 

जहां पसीना रुकता है, वहां फंगल इंफेक्शन का खतरा अधिक

डॉ. एनके वर्मा ने बताया कि इस वक्त फंगल इंफेक्शन के मरीज ज्यादा है। फंगल इंफेक्शन शरीर के पसीना रुकने वाले स्थानों पर अधिक होता है, जैसे अंडर आर्म्स, जांघ, छाती का निचला भाग और उंगलियों के बीच में। इसके अलावा उंगलियों के बीच, चेहरे पर या शरीर के अन्य जगहों पर गर्मी की वजह से दाने निकलने के मरीज भी आ रहे हैं। इसमें 15 से 20 प्रतिशत बच्चे हैं, जिनके शरीर पर दाने निकल रहे हैं। ऐसे बच्चों के दाने उन्हें ज्यादा दर्द दे रहे हैं। इसे विज्ञान की भाषा में मिलिरिया रुबेरा कहते हैं। यह बेहद गंभीर होता है। समय पर अगर इलाज न हो तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता और पूरे शरीर में फैल जाता है।

इस तरह से करें बचाव

  • ताजे और ठंडे पानी से रोजाना स्नान करें।
  • नहाते समय पानी में एंटीसेप्टिक की बूंदे डालें।
  • त्वचा के लिए एंटीबैक्टीरियल साबुन का प्रयोग करें।
  • खुद से उपचार न करें।
  • इंफेक्शन है तो पहनने के कपड़ों को गर्म पानी में उबालकर धुलें और धूप में अच्छे से सुखाएं।
  • गर्मियों में हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े पहनें।
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