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Gorakhpur News: भारत की विशालता और भव्यता है बदलाव का आधार
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डीडीयू के दर्शन शास्त्र विभाग की ओर से आयोजित संगोष्ठी के दौरान पुस्तक विमोचन करते प्रो. राजवंत
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गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग एवं मौलाना अबुल कलाम आजाद एशियाई अध्ययन केंद्र, कोलकाता के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ।
उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता प्राचीन इतिहास के प्रो. राजवंत राव ने कहा कि भारत की संस्कृति, सोच और व्यवस्था में जो निरंतर बदलाव और विकास हो रहा है, वही इसकी विशालता और भव्यता का मुख्य आधार है। प्रो. सभाजीत मिश्र ने भारत की परिकल्पना में गांधी और विवेकानंद के विचारों पर अमल करने की बात कही। बताया कि आत्मबोध और आत्मज्ञान के बिना वृद्धि भारत की परिकल्पना अधूरी है।
डॉ. स्वरूप प्रसाद घोष ने रामायण, महाभारत, गांधी एवं विवेकानंद के विचारों को प्रस्तुत किया। अध्यक्षता गौर हरि बेहरा ने की। डॉ. संजय राम ने समन्वयन किया।
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उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता प्राचीन इतिहास के प्रो. राजवंत राव ने कहा कि भारत की संस्कृति, सोच और व्यवस्था में जो निरंतर बदलाव और विकास हो रहा है, वही इसकी विशालता और भव्यता का मुख्य आधार है। प्रो. सभाजीत मिश्र ने भारत की परिकल्पना में गांधी और विवेकानंद के विचारों पर अमल करने की बात कही। बताया कि आत्मबोध और आत्मज्ञान के बिना वृद्धि भारत की परिकल्पना अधूरी है।
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डॉ. स्वरूप प्रसाद घोष ने रामायण, महाभारत, गांधी एवं विवेकानंद के विचारों को प्रस्तुत किया। अध्यक्षता गौर हरि बेहरा ने की। डॉ. संजय राम ने समन्वयन किया।