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पत्नी की हत्या के दोषी सुहेब इलियासी की अपील पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित
Updated Fri, 17 Aug 2018 09:52 PM IST
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सुहेब इलियासी की अपील
पर फैसला सुरक्षित
- 18 साल पहले पत्नी की चाकू मारकर हत्या के मामले में पिछले साल मिली थी उम्रकैद
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने पहली पत्नी की हत्या के दोषी टीवी एंकर और प्रोड्यूसर सुहेब इलियासी की उम्रकैद की सजा के खिलाफ अपील पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। इलियासी को पत्नी की चाकू से हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया है। वह वर्तमान में जेल में है।
दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले से जुड़े सभी लोगों से 10 दिन के भीतर लिखित पक्ष मांगा है। सुहेब इलियासी को जनवरी 2000 में पहली पत्नी अंजू की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। दिसंबर 2017 को उसे जेल भेज दिया गया था। इसके बाद इलियासी ने हत्या के आरोपों को गलत ठहराते हुए कहा था कि सभी चश्मदीदों से क्रॉस एग्जामिन के लिए भी उसे अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद हाईकोर्ट ने 26 अप्रैल 2014 को उसे अंतरिम जमानत दे दी थी। मई 2014 में हाईकोर्ट ने उसकी जमानत अवधि बढ़ाने से इंकार कर दिया था। इसके बाद इलियासी ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से भी उसे जमानत नहीं मिली।
इलियासी ने अपनी याचिका में कहा है कि पुलिस को अंजू की हत्या के संबंध में उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला तो उस पर हत्या की धाराएं कैसे लगाई जा सकती हैं। पुलिस ने दलील दी कि इलियासी ने पुलिस को जांच में सहयोग करने के नाम पर गुमराह किया है। 20 दिसंबर 2017 को ट्रायल कोर्ट ने इलियासी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
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पर फैसला सुरक्षित
- 18 साल पहले पत्नी की चाकू मारकर हत्या के मामले में पिछले साल मिली थी उम्रकैद
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने पहली पत्नी की हत्या के दोषी टीवी एंकर और प्रोड्यूसर सुहेब इलियासी की उम्रकैद की सजा के खिलाफ अपील पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। इलियासी को पत्नी की चाकू से हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया है। वह वर्तमान में जेल में है।
दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले से जुड़े सभी लोगों से 10 दिन के भीतर लिखित पक्ष मांगा है। सुहेब इलियासी को जनवरी 2000 में पहली पत्नी अंजू की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। दिसंबर 2017 को उसे जेल भेज दिया गया था। इसके बाद इलियासी ने हत्या के आरोपों को गलत ठहराते हुए कहा था कि सभी चश्मदीदों से क्रॉस एग्जामिन के लिए भी उसे अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद हाईकोर्ट ने 26 अप्रैल 2014 को उसे अंतरिम जमानत दे दी थी। मई 2014 में हाईकोर्ट ने उसकी जमानत अवधि बढ़ाने से इंकार कर दिया था। इसके बाद इलियासी ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से भी उसे जमानत नहीं मिली।
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इलियासी ने अपनी याचिका में कहा है कि पुलिस को अंजू की हत्या के संबंध में उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला तो उस पर हत्या की धाराएं कैसे लगाई जा सकती हैं। पुलिस ने दलील दी कि इलियासी ने पुलिस को जांच में सहयोग करने के नाम पर गुमराह किया है। 20 दिसंबर 2017 को ट्रायल कोर्ट ने इलियासी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।