रेल तो मिली नहीं, इंजन भी हाथ से गया
नोएडा को रेलवे लाइन का तोहफा तो मिला नहीं, अब अंग्रेजों के जमाने का ऐतिहासिक ‘विक्टोरिया क्वीन’ इंजन भी इसका साथ छोड़ने जा रहा है।
बरौला गांव में खड़ा यह इंजन अब दिल्ली के एक फार्म हाउस की शान बढ़ाएगा। अंग्रेजी हुकूमत की याद दिलाता ये इंजन सात साल पहले नोएडा के फार्म हाउस लाया गया था।
पिछले तीन दशकों से नोएडा को इंतजार है कि रेल बजट में उसके लिए कुछ खास हो, लेकिन रेल की सीटी का इंतजार कर रहे इस शहर को अभी तक कुछ हासिल नहीं हुआ है। अब विक्टोरिया क्वीन इंजन भी इस शहर से जा रहा है।
खेत की शोभा बढ़ाने के लिए खरीदा था
करीब सात साल पहले दिल्ली के कारोबारी हरीमोहन शर्मा ने अपने खेत की शोभा बढ़ाने के लिए इस इंजन को खरीदा था। नीलामी के जरिए खरीदी गई रेलवे की इस संपत्ति को बड़ी मुश्किलों से नोएडा लाया गया।
शुरूआती दौर में 1857 मॉडल के इस इंजन देखने के लिए खेत के आसपास लोगों का जमावड़ा लगता था। इसकी सुरक्षा के लिए खेत की चारदीवारी करानी पड़ी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।
जमीन की आसमान छूती कीमतों के बीच खेत को बेचने की तैयारी चल रही है, लेकिन ‘विक्टोरिया क्वीन’ के प्रति कारोबारी का मोह बरकरार है। इसे महरौली के अंधेरिया मोड़ स्थित फार्म हाउस ले जाने की तैयारी शुरू हो गई है।
इतिहास का गवाह है ये इंजन
इंजन को खरीदने के लिए कई लोग आगे आ चुके हैं, लेकिन हरीमोहन ने किसी को इंजन नहीं बेचा। देखभाल करने वाले संजय ने बताया कि इतिहास की इस बेशकीमती धरोहर को दुरुस्त कराकर फार्म हाउस में रखा जाएगा।
पिछले साल आईआरसीटीसी (इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन) ने विक्टोरिया को खरीदने की इच्छा जाहिर की थी।
विक्टोरिया क्वीन इंजन को लंदन में बनाया गया था। हजारों किलोमीटर लंबा सफर तय करने वाला यह इंजन 1857 की क्रांति का गवाह रहा है। हालांकि, आजादी की लड़ाई के बाद अंग्रेजों को भारत छोड़ना पड़ा, लेकिन विक्टोरिया क्वीन भारतीय रेल का हिस्सा बनकर रह गया।