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Delhi NCR News: उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए पोर्टल दोबारा खोलने का निर्देश देने से हाईकोर्ट का इन्कार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jun 2026 07:52 PM IST
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कोर्ट ने कहा- परिणाम और दाखिले की प्रकिया में हो जाएगी देरी, एनएसयूआई ने दायर की थी याचिका

असंतुष्ट छात्रों को व्यक्तिगत रूप से उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाने की सलाह
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सीबीएसई 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए पोर्टल दोबारा खोलने का निर्देश देने से इन्कार कर दिया। छात्र संगठन एनएसयूआई की ओर से दायर जनहित याचिका पर कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्तिगत छात्र संतुष्ट नहीं है तो वह उचित कानूनी कार्रवाई कर सकता है। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा और न्यायमूर्ति मधु जैन की अवकाश पीठ ने कहा कि पोर्टल को दोबारा खोलने से परिणाम घोषित करने की पूरी प्रक्रिया में देरी हो जाएगी।
याचिका पर बेंच ने टिप्पणी की कि आपके लिए यह एक सप्ताह की बात है, लेकिन इससे पूरी प्रक्रिया एक महीने के लिए विलंबित हो जाती है। आप समझ नहीं रहे हैं। यह एक चरण की प्रक्रिया नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा, मैं आगे कोई निर्देश नहीं दे रही हूं। जो कोई भी पीड़ित है, वह व्यक्तिगत रूप से संपर्क करें। पुनर्मूल्यांकन के लिए सीबीएसई का पोर्टल 2 से 7 जून तक खुला था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में बताया कि 1.67 लाख से अधिक छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया है और 3.8 लाख उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की जा रही है।
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उन्होंने कहा कि यह कोई छोटा आंकड़ा नहीं है और इससे साबित होता है कि पोर्टल ने काम किया है। मेहता ने आगे कहा कि याचिका बहुत सामान्य धारणाओं पर आधारित है और यदि एनएसयूआई की मांग मान ली गई तो 17 लाख से अधिक छात्रों के स्नातक प्रवेश पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। कोर्ट ने एनएसयूआई के आग्रह पर मामले की सुनवाई जुलाई में नियमित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
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याचिका में सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की भी मांग की गई है। एनएसयूआई का कहना है कि इस वर्ष 12वीं के परिणामों में समग्र प्रदर्शन में भारी गिरावट छात्रों और अभिभावकों में चिंता का विषय बनी हुई है, खासकर जब स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं के लिए बड़ी संख्या में अनुरोध किए गए। याचिका में दावा किया गया है कि मौजूदा शिकायत तंत्र अपर्याप्त है क्योंकि इसमें छात्रों को सीमित डिजिटल उपचार और विवादित उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन के लिए कोई सार्थक प्रक्रिया उपलब्ध नहीं कराई गई है।
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