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Delhi NCR News: शादी का झांसा देकर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड गिरफ्तार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jun 2026 08:18 PM IST
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-शाहदरा साइबर पुलिस ने ग्वालियर से आरोपी को दबोचा, कई राज्यों में फैला रखा था फर्जी कॉल सेंटर का नेटवर्क

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
शाहदरा साइबर सेल ने शादी कराने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले एक साइबर गैंग का खुलासा किया है। पुलिस ने गैंग के सरगना को ग्वालियर मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया है। पहचान प्रदीप सिंह उर्फ प्रदीप साहू के रूप में हुई है। आरोपी ग्वालियर, गुना, अयोध्या और आजमगढ़ सहित कई जगहों पर फर्जी कॉल सेंटरों का नेटवर्क चलाकर लोगों से शादी से जुड़ी सेवाएं देने के नाम पर ठगी करता था।
जिला पुलिस उपायुक्त आरपी मीणा ने बताया कि पिछले साल अक्तूबर में ईस्ट आजाद नगर निवासी राज ने ठगी की शिकायत की। उसने बताया कि फेसबुक पर उन्हें शादी से जुड़ा एक विज्ञापन दिखा। विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद कुछ लोगों ने उनसे संपर्क किया और शादी कराने का भराेसा दिया। आरोपियों की बातों में आकर शिकायतकर्ता ने उनके दिए गए क्यूआर कोड के जरिए करीब 81 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में उन्हें पता चला कि शादी करवाने के नाम पर उनसे धोखाधड़ी की गई है।
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बैंक खाते से शुरू हुई जांच मास्टरमाइंड तक पहुंची
निरीक्षक विजय कुमार टीम ने उस बैंक खाते की जांच की, जिसमेंं ठगी की रकम गई थी। रकम ग्वालियर के शालिनी शिवरे के खाते में ट्रांसफर हुई थी। पुलिस ग्वालियर पहुंची ताे पता चला कि वहां राजकुमारी नाम की महिला एक कॉल सेंटर चला रही थी। पूछताछ में राजकुमारी ने बताया कि रिश्ते गाइड सर्विसेज नाम से चल रहे कॉल सेंटर का असली संचालक प्रदीप साहू है और वह उसी के निर्देशों पर काम करती है। इसके बाद पुलिस ने प्रदीप साहू को गिरफ्तार कर लिया।
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पांच साल से चला रहा था ठगी का कारोबार
आरोपी ने बताया कि वह पिछले करीब पांच साल से फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था। उसने अलग-अलग राज्यों में लगभग 14 कॉल सेंटर खोले थे। इन सेंटरों में कर्मचारियों को विज्ञापनों के जरिए भर्ती किया जाता था। इसके बाद लोगों से संपर्क कर ठगी करने की ट्रेनिंग दी जाती थी। गिरोह के कर्मचारी पीड़ितों को शादी कराने, प्रोफाइल एक्टिवेट करने और रजिस्ट्रेशन के नाम पर भरोसे में लेते थे। इसके बाद उनसे रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोफाइल एक्टिवेशन चार्ज और अन्य फर्जी सर्विस चार्ज के नाम पर पैसे वसूलते थे।
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