भाजपा जोड़-तोड़ को तैयार, दिल्ली में बनेगी सरकार!
दिल्ली में सरकार बनाने की कवायद एक बार फिर तेज हो गई है। इस बार आम आदमी पार्टी नहीं बल्कि जोड़तोड़ कर सरकार नहीं बनाने पर अड़ी भाजपा ने अपना रुख लचीला किया है।
सभी पार्टियों के ज्यादातर विधायकों के दोबारा चुनाव में नहीं जाने की मंशा को देखते हुए भाजपा के शीर्ष नेताओं के एक धड़े ने भी इस प्रयोग के लिए हरी झंडी दे दी है।
लिहाजा प्रदेश भाजपा ने सरकार बनाने की संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी है। बिजली-पानी संकट और जनता की नाराजगी के बाद दिल्ली के विधायक मध्यावधि चुनाव से बचना चाह रहे हैं।
आप-कांग्रेस की लड़ाई का उठएंगे फायदा
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के विधायक लोकसभा चुनाव में अपनी बुरी हालत को देखकर जल्द चुनाव में जाना बेहतर नहीं समझ रहे हैं। इन दोनों दलों में दोबारा सरकार बनाने को लेकर समझौता भी नहीं हो पाया।
भाजपा को अब उम्मीद दिख रही है कि उसे आम आदमी पार्टी के कुछ विधायकों के अलावा एक निर्दलीय और एक आम आदमी पार्टी से निष्कासित विधायक का साथ मिल सकता है।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी के एक शीर्ष नेता ने प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ विधायकों को सरकार बनाने की अनुमति दे दी है। हालांकि इस प्रयास का विरोध भी हो रहा है। वहीं संघ ने भी अब तक सरकार बनाने को हरी झंडी नहीं दी है।
कांग्रेस विधायकों को टटोल रहे हैं भाजपाई
भाजपा नेताओं का मानना है कि कांग्रेस के छह विधायक उसके पक्ष में आ सकते हैं। उनका समर्थन पाने को भाजपा नेता दो विकल्प देख रहे हैं। एक तो कांग्रेस से टूटे विधायकों को भाजपा में मर्ज कर लिया जाए।
दूसरा, उनसे अलग पार्टी बनवाकर बाहर से समर्थन लिया जाए। हालांकि आम आदमी पार्टी के कई विधायक सरकार बनाने केलिए भाजपा के पक्ष में बताए जा रहे हैं।
लेकिन उन्हें अपने साथ जोड़ने के लिए संख्या 18 से अधिक चाहिए। लिहाजा ऐसी तरकीब निकाली जा रही है कि वे बाहर से ही समर्थन देने के लिए राजी हो जाएं।
भाजपा के दो वरिष्ठ विधायक हैं सक्रिय
सरकार बनाने को लेकर भाजपा के दो वरिष्ठ विधायक सक्रिय दिखाई पड़ रहे हैं। विधायक प्रो. जगदीश मुखी को सबसे अधिक सक्रिय बताया जा रहा है। मुखी पहले भी कह चुके हैं कि भाजपा के विधायक दोबारा चुनाव नहीं चाहते हैं।
मुखी के साथ ही भाजपा विधायक रामवीर सिंह बिधूड़ी भी सरकार बनाने की जोड़तोड़ में जुटे हुए हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जल्द इन्हीं दोनों में से किसी एक को भाजपा विधायक दल का नेता चुना जाएगा।
इसके बाद वे सरकार बनाने का प्रस्ताव उप राज्यपाल के सामने पेश करेंगे। हालांकि यह तय होगा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चुने जाने के बाद।