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'निर्भया' के लिए सीएम को नहीं मिला वक्त

ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 11 Mar 2015 02:59 AM IST
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nirbhaya bus service in uttarakhand.
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मुख्यमंत्री के जरूरी कामों में व्यस्त होने के कारण महिलाओं के लिए संचालित होने वाली ‘निर्भया’ बसों का शुभारंभ मंगलवार को टल गया।

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मुख्यमंत्री ने इसके लिए बुधवार शाम का समय दिया है। यह बसें रोजाना दून से ऋषिकेश और दून से हरिद्वार के लिए कई फेरे लगाएंगी।

उत्तराखंड परिवहन निगम को यह योजना सफल होने की पूरी उम्मीद है। दरअसल दून से रोजाना ऋषिकेश और हरिद्वार सैकड़ों कामकाजी महिलाएं आती-जाती हैं। इन महिलाओं की ऐसी विशेष बसें चलाने की मांग थी।

इसी के मद्देनजर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने निगम अधिकारियों को महिलाओं के लिए तत्काल अलग बसें चलाने का आदेश दिया था। मंगलवार को निर्भया बसों का उद्घाटन मुख्यमंत्री हरीश रावत को करना था, लेकिन राज्य सभा चुनाव का नामांकन और विधानसभा सत्र से पहले आयोजित बैठक में व्यस्त होने से उन्होंने आने से असमर्थता जताई।
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प्रबंध निदेशक उत्तराखंड परिवहन निगम बृजेश संत ने बताया कि अब विशेष बसों का शुभारंभ बुधवार शाम पांच बजे किया जाएगा।

दिल्ली-मसूरी के लिए चलेगी ‘निर्भया’ वॉल्वो

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पहले चरण में महिलाओं ने इस सेवा को सफलता दिलाई तो उत्तराखंड रोडवेज दून से मसूरी और उसके बाद दून से दिल्ली के लिए भी विशेष बस चलाएगा। इसमें सुरक्षा के ऐसे सभी उपाय होंगे, जिन्हें वक्त रहते महिलाएं इस्तेमाल कर सकेंगी।

उत्तराखंड रोडवेज संयुक्त परिषद के राज्य महामंत्री रामचंद्र रतूड़ी ने बताया कि दिल्ली के लिए सुरक्षा के मद्देनजर महिलाएं ज्यादा वॉल्वो में जाती हैं। काफी मांग पर परिवहन मुख्यालय महिलाओं के लिए अलग वॉल्वो चलाने जा रहा है।

प्रबंध निदेशक बृजेश संत ने बताया ‘निर्भया’ सफल रही तो मसूरी के लिए भी रोजाना कई बसें दून से चलाई जाएंगी। तीसरे चरण में दून से दिल्ली भी बसें दौड़ाई जाएंगी।

परिचालक भी हैं बहादुर बेटियां

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‘निर्भया’ बसों में परिचालक भी उत्तराखंड की बहादुर बेटियां ही हैं। दोनों परिचालक बनने से खासी उत्साहित है। बताती हैं कि वो काफी समय से बसों में परिचालक पद पर तैनात हैं। नौकरी में आने पर परिजनों को कुछ डर लगा, लेकिन स्टाफ के सहयोग से कभी दिक्कत नहीं हुई।

हरिद्वार की बस में कंडक्टर चंद्रकांता रावत ने बताया कि सवारियों की ओर से कोई दिक्कत नहीं हुई। सबने हौसला बढ़ाया। चंद्रकांता 45 साल की हैं। पति की मृत्यु के बाद मृतक आश्रित के रूप में उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई। परिवार की जिम्मेदारी उनके ऊपर है। बताती हैं, कामकाजी महिलाओं को हरिद्वार लाने छोड़ने में बेहद खुशी मिलती है।

चंद्रकला के दो बच्चे हैं। उधर, ऋषिकेश की बस में प्रेमनगर निवासी रुचि दीवान तैनात है। रूचि पहले प्रेमनगर में पीएनबी बैंक में बतौर संविदा तैनात थी। पिता की मृत्यु के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई। वो अपने अनुभव बताती है कि शुरुआत में डर लगा, लेकिन मां ने ही हौसला दिया।

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