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सबसे बड़ी धार्मिक यात्रा पर संशय बरकरार
राजा तिवारी
Updated Mon, 12 Aug 2013 11:26 AM IST
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विश्व की सबसे बड़ी पैदल धार्मिक यात्रा श्री नंदा देवी राजजात के शुरू होने में 18 दिनों का समय शेष बचा हैं। लेकिन यात्रा के पड़ावों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। यात्रा मार्गों को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला नंदप्रयाग-घाट मोटर मार्ग पिछले दो सप्ताह से नहीं खुल पाया है।
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जबकि इसी मार्ग से यात्रा संचालित होती है। ऐसे में अब यात्रा के संचालन और सुरक्षा को लेकर संशय गहराता ही जा रहा है। अब शासन द्वारा भी यात्रा के संचालन के लिए राजजात यात्रा समिति को पुनर्विचार करने की बात कही है।
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राहत कार्य किश्तों में
नंदा देवी राजजात यात्रा के वापसी के पड़ावों में अभी तक मोटर मार्गों के अवरुद्ध होने के चलते राहत कार्य किश्तों में किए जा रहे हैं। जिससे यहां गांवों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। गांवों में पेयजल, विद्युत और अन्य वस्तुओं की सुचारु सुविधाएं भी नहीं मिल पाने से ग्रामीण खासे परेशान हैं।
यात्रा मार्ग के चौथे पड़ाव कांडई गांव में बहरहाल आपदा से कोई क्षति नहीं हुई है। लेकिन यात्रा के तीसरे पड़ाव खुनाणा से कांडण्ई तक पैदल मार्ग ध्वस्त पड़ा है। यहां खाली हाथ भी जाना संभव नहीं है, ऐसे में इस मार्ग से डोली और निशानों के साथ यहां से यात्रा का गुजरना सुरक्षित नहीं कहा जा सकता।
वहीं कांडई से आगे की यात्रा मार्ग में पड़ने वाले चरी और चोपड़ा कोट गांवों की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है। जिसको देखते हुए यात्रा संचालन के लिए सरकार द्वारा यात्रा समिति से पुर्नविचार करने के लिए कहा गया है।
श्री नंदा देवी राजजात यात्रा को भव्य रुप देने के लिए सरकार द्वार सभी तैयारियां की गई थी। लेकिन आपदा के चलते अब यात्रा मार्ग पूर्ण रुप से क्षत-विक्षत हो गए हैं। ऐसे में सुरक्षित यात्रा नहीं हो सकती। अतैव समिति को यात्रा संचालन पर पुर्नविचार करना चाहिए।
- अनुसूया प्रसाद मैखुरी, विधायक कर्णप्रयाग
क्षेत्र में आपदा के बाद अभी तक भी स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है। ऐसी विषम परिस्थितियों में यात्रा का संचालन किया जाना कठिन है। राजजात यात्रा समिति को सीमित लोगों के साथ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर यात्रा आयोजित करनी चाहिए।
- राजपाल कन्याल, पूर्व ब्लॉक प्रमुख घाट
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