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इस बार नहीं हो पाएगा देवी-देवताओं का मिलन!
कर्णप्रयाग/ब्यूरो
Updated Tue, 13 Aug 2013 08:45 PM IST
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राजजात यात्रा का अंतिम गांव वाण है। गांव में सड़क, शिक्षा, संचार और स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ रही हैं। गांव को पर्यटन ग्राम घोषित करने, लाटू देवता के मंदिर को पांचवें धाम के रूप में मान्यता दिए जाने की मांग पर भी अमल नहीं हो पा रहा है।
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मुंदोली से वाण प्रस्थान करते समय मां नंदा लोहाजंग पहुंचती है। मान्यता है कि यहां पर देवी ने लोहासार दैत्य का वध किया था, इसलिए यहां का नाम लोहाजंग पड़ा। इस स्थान पर नंदादेवी का चबूतरा है, जिसमें राजजात और लोकजात के समय देवी की छंतोली और डोली रखी जाती है। मां नंदा के साथ इस स्थान पर द्यौ सिंह, काली और दानू देवता का मंदिर भी है।
काम तो हुए पर बारिश ने किया बर्बाद
9.54 लाख का लोहाजंग मार्ग सुधार और 16.26 लाख में वाण मार्ग का सुधार कार्य अधूरा पड़ा है। लोहाजंग में 11.42 लाख और वाण में 15.99 लाख के रेन सेल्टर कार्य अधूरे पड़े हैं। 10.25 लाख से वाण-डाडीगाड पुल से रडकीधार तक पैदल मार्ग, 38.51 लाख से वाण में पेयजल योजना, 11.68 लाख से वाण में बारात घर, 15 लाख की लागत से वाण गांव में दो पैदल सीसी मार्ग, 4.97 लाख में प्राथमिक विद्यालय की छत का निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं, लेकिन पैदल रास्ते बरसात से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
यहां होता देवी-देवताओं का मिलन
राजजात में नौटी से मां नंदा की छंतोली, दशोली और कुरुड़ से नंदा की डोली, केदारू देवता सहित क्षेत्र के दो सौ से अधिक देवी-देवताओं की छंतोली और निशान यहां पहुंचते हैं।
लाटू का प्राचीन मंदिर
यहां गांव में लाटू देवता का प्राचीन मंदिर है। लाटू को मां नंदा का धर्म भाई माना जाता है। देवता के मंदिर वर्षभर में एक बार ही खुलते हैं। नंदा राजजात के मौके पर नंदा के यहां पहुंचने पर लाटू स्वयं यात्रा की अगुवाई करता है। गांव में देवता का मंदिर देवदार के वृक्षों के बीच में है। लाटू देवता वाण से राजजात यात्रा की होमकुंड तक आगवानी भी करता है।
लोहाजंग-वाण मोटर मार्ग बदहाल हो चुका है। गांव के लिए स्वीकृत कार्यों में जिन रास्तों का निर्माण हुआ था, वे बरसात की भेंट चढ़ गए हैं। लेकिन समस्त ग्रामीण अपने स्तर से सभी भक्तों के लिए इंतजाम करेंगे। वाण गांव अपनी आराध्य के दर्शनों के लिए इंतजार कर रहा है।
- बलवीर सिंह/रघुवीर सिंह निवासी वांण गांव
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