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दून में मनी लॉंड्रिंग की जड़ें हो रही मजबूत
रजा शास्त्री / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 22 May 2014 02:11 PM IST
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देहरादून में वन्य जीव तस्कर, भू-माफिया और मनी लॉंड्रिंग करने वाले अपना काला धन यहां रियल इस्टेट में लगा रहे हैं।
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कई माफिया की संपत्ति पकड़ में आई
वित्त मंत्रालय के प्रवर्तन निदेशालय ऐसे कई मामलों में जांच कर रहा है। कई माफिया की संपत्ति पकड़ में आई है। ऐसे 9 मामलों की जांच प्रदेश में चल रही है।
महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश समेत कई प्रांतों के तस्करों और माफिया ने अपना पैसा दून में लगाया है। सबसे अधिक पैसा यहां रियल इस्टेट में लगाया गया है। प्रवर्तन निदेशालय ने इसकी जांच शुरू कर दी है।
प्रवर्तन निदेशालय ने यूपीएसआईडीसी के चीफ इंजीनियर अरुण कुमार मिश्र की दो संपत्तियां बलवीर रोड डालनावाला में अटैच की थीं। निदेशालय के सूत्रों ने बताया कि मिश्रा की कुछ संपत्तियां राजपुर रोड पर भी हैं।
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जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई होगी। प्रवर्तन निदेशालय वन्य जीव तस्करी के मामले में पेंगोलिन केस पर पहले ही कार्रवाई कर चुका है। इसके अलावा वन्य जीव तस्करी के और भी मामले पकड़ में आए हैं।
निदेशालय ने शुरू कर दी छानबीन
स्पीक एशिया का काला धन यहां रियल इस्टेट में लगाया गया है। निदेशालय ने इसकी छानबीन शुरू कर दी है।
निदेशालय के विशेष निदेशक कर्नल सिंह ने बताया कि इस मामले में एफआईआर दिल्ली में हुई है इस वजह से दिल्ली की टीम यहां जांच करेगी।
उत्तराखंड में मनी लॉंड्रिंग के कुल नौ केस मिले हैं। इनमें अंतिम कार्रवाई और संपत्ति अटैचमेंट होनी बाकी है। अनुमान है कि ये सभी मामले 12 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के हैं।
निदेशालय के अधिकारियों का कहना है कि काले धन के इनवेस्टमेंट की जड़ें प्रदेश में गहरी होती जा रही हैं। इधर कुछ सालों से काले धन के कारोबारियों का रुझान उत्तराखंड की ओर हो गया है।
रियल इस्टेट के सूत्रों का कहना है कि मनी लॉंड्रिंग का धन यहां लोकल माफिया के माध्यम से लगाया जा रहा है।

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