सावनः पहले सोमवार बोल बंम से गूंजे शिवालय
सावन यानी भगवान शिव का महीना। भगवान भोले की आराधना और भक्ति का महीना। हरियाली और खुशहाली का महीना।
इस महीने में भोले शंकर सौम्य और सुंदर रूप में होते हैं। माना जाता है कि इस माह अपनी दर पर आने वाले को शिव निराश नहीं करते हैं। यही वजह है कि देवालय से लेकर निवासालय तक में पूजे जाते हैं देवों के देव।
हर-हर महादेव और ऊं नम: शिवाय से गूंजती रहती है फिजा। वैसे तो रविवार से सावन मास की शुरुआत हो गई है। लेकिन माह का पहला सोमवार आज है।
मंदिरों में खास तैयारी
माह शुरू होते ही दूसरे दिन सोमवार पड़ने से भोले के भक्त खुश हैं। मंदिरों में खास तैयारी की गई है। इस दिन भोले बाबा का महारुद्राभिषेक किया जाएगा।
हर कोई भोले के सौम्य और सुंदर रूप को निहारने के लिए उतावला है। श्रावण माह के पहले दिन रविवार को लोगों ने मंदिरों में भोलेनाथ का अभिषेक किया।
टपकेश्वर मंदिर में सुबह साढ़े चार बजे से ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया था। चार बजे कपाट खुलते ही भक्तों ने बाबा का अभिषेक शुरू किया।
सोमवार को टपकेश्वर मंदिर में जाप अनुष्ठान के बीच भोले का महारुद्राभिषेक किया जाएगा। मंदिर के स्वामी दिगंबर भरत गिरी ने बताया कि श्रावण मास में शिवजी का पूजन अभिषेक करने वाला कोई भी उनके दर से खाली नहीं लौटता।
इस महीने बाबा अपने सौम्य रूप में होते हैं। बताया कि सुबह साढ़े चार बजे विशेष अभिषेक के बाद श्रद्धालुओं के लिए कपाट खोले जाएंगे।
महोत्सव के रूप में मनाया जाएगा श्रावण मास
सावन के पहले सोमवार को डाकरा स्थित नागेश्वर मंदिर में सुबह 6 बजे से बाबा का पूजन हो रहा है।
महंत विश्वनाथ योगी ने बताया कि मंदिर में 21 जुलाई से 11 अगस्त तक शिव महापुराण का आयोजन होगा। श्री पृथ्वीनाथ मंदिर में श्रावण मास को शिव महोत्सव के रूप में मनाया जाएगा।
मंदिर के सेवादार संजय गर्ग ने बताया कि सुबह-शाम विशेष आरती होगी। इसके अलावा गीता भवन, पंचायती मंदिर, शिव मंदिर सभी जगह सावन के पहले सोमवार पर बाबा का विशेष अभिषेक होगा और सुबह-शाम विशेष आरती होगी।
अलग-अलग मान्यता
श्रावण मास की शुरुआत को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। कुछ लोग इस पावन महीने की शुरुआत गुरु पूर्णिमा के अगले दिन से मानते हैं।
इस मान्यता के अनुसार श्रावण मास की शुरुआत रविवार से हुई और पहला सोमवार आज होगा। वहीं, संक्रांति से शुरुआत मानने वाले लोगों के लिए श्रावण मास 16 जुलाई से शुरू होगा और पहला सोमवार 21 जुलाई को पड़ेगा।
श्रावण मास में भगवान शिव के अभिषेक के साथ पंचतत्वों दूध, दही, बेलपत्र, शहद और फूलों से पूजन किया जाता है।
पंचाक्षरी और महामृत्युंजय मंत्र के जाप के अलावा पूरे महीने शिव महापुराण की कथा पढ़ने और सुनने का विशेष महत्व माना गया है।
(नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी-nailinig@ddn.amarujala.com और इस नंबर- 9897830519 पर संपर्क कर सकते हैं।)

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