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द्वितीया तिथि में भाई-दूज मनाना शुभ
नलिनी गुसाईं/अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 30 Oct 2013 11:17 PM IST
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दीपावली के बाद मनाया जाने वाला भाई-दूज का पर्व द्वितीया तिथि में ही मनाया जाना शुभ माना जा रहा है। पांच नवंबर को द्वितीया तिथि दोपहर 1 बजकर 16 मिनट तक ही है। ज्योतिषियों की माने तो इसी शुभ मुहूर्त में बहने अपने भाईयों को टीका कर लें।
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मान्यता
कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया को दीपोत्सव के पांच पर्वो का अंतिम पर्व भाई-दूज मनाया जाता है। आचार्य डॉ. सुशांत राज ने बताया कि भविष्यपुराण की प्रासंगिक कथा के अनुसार यमराज और उनकी बहन यमी के बीच अगाध स्नेह था।
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एक दिन यमी ने अपने भाई यमराज को घर आकर भोजन करने का निमंत्रण दिया। उस निमंत्रण को पाकर अतिव्यस्त होते हुए भी यमराज ने बहन के घर पहुंचकर भोजन किया। इसके पश्चात यमी ने भाई को टीका लगाया।
यमराज ने यमी को उपहार दिए और वरदान मांगने को कहा। यमी ने कहा कि जो बहन इस दिन अपने भाई को घर बुलाकर भोजन कराए, टीका करे, उस भाई को यमलोक का भय नहीं होगा। यमराज ने यमी को वरदान दे दिया। माना जाता है कि तब से ही भाई-दूज का यह पर्व मनाया जाने लगा।
इनका करें पूजन
आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार इस दिन देवताओं के प्रमुख शिल्पी विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। इसके साथ ही ब्रह्मा के पुत्र चित्रगुप्त का दोपहर में कायस्थ जाति के लोग अपने इस कष्ट कुलगुरू की पूजा करते हैं। चित्रगुप्त धर्मराज की सभा में पृथ्वीवासियों के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा करते हैं।
गोवर्धन पूजा पर 56 प्रकार के भोग
भगवत के दशम स्कंध के पच्चीसवें अध्याय में गोवर्धन पूजन का वर्णन है। इस दिन भगवान को 56 प्रकार के भोग लगाए जाते हैं और गौ माता की पूजा की जाती है। गोवर्धन पूजन के दिन श्री श्याम सुंदर मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, गीता भवन, पंचायती मंदिर आदि जगहों पर भगवान का विशेष पूजन करने के बाद 56 प्रकार के भोग लगाए जाएंगें।
हनुमान जयंती
छोटी दीपावली के दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है। इसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर दैत्य का वध किया था। इस दिन अकाल मृत्यु से मृत प्राणियों की सद्गति के लिए तीर्थ स्थान पर दीपदान करना चाहिए। इस दिन पितरों के लिए दीपदान भी किया जाता है।

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