दुश्मनों से जीतने वाले सैनिक अब करेंगे नेताजी पर 'वार'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोकसभा चुनाव में सैनिकों, पूर्व सैनिकों सहित अर्द्धसेना बलों के मत किसी भी प्रत्याशी की जीत हार में अहम रहेंगे।
राज्य की कुल आबादी का 15 फीसदी सैन्य और अर्द्धसैन्य बलों से जुड़ी होने के चलते जीत और हार में उनके मत अहम रहेंगे।
पूर्व सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन और अर्द्धसेना बलों के लिए एक्ससर्विसमैन के समान सुविधाएं देने का फैसला कांग्रेस बड़ा कदम मान रही है तो वहीं भाजपा इसे सिर्फ चुनानी स्टंट साबित करने में लगी है।
सैनिक वोट भुनाने में लगी पार्टियां
भाजपा पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूडी के कार्यकाल के साथ अपनी पुरानी सैनिक हितैषी छवि के बूते चुनाव में उतरेगी।
राज्य के पौने दो लाख पूर्व सैनिक व सैन्य विधवाएं, 70 हजार सेवारत सैनिक और सवा़ लाख अर्द्धसैनिक बलों से रिटायर और कार्यरत जवान व अधिकारी हैं।
सरकार ने पूर्व सैनिकों के हितों में बीते चार माह में हाउस टैक्स में माफी, सैनिक स्कूल जखोली, स्टांप ड्यूटी में छूट, वीरता पदकों की राशि बढ़ाने, शहीदों को 10 लाख रुपए का सम्मान सहित कई फैसले दिसंबर 2013 के बाद लिए गए हैं।
हालांकि भाजपा सरकार के कार्यकाल में पूर्व सैनिकों के लिए कल्याण योजनाओं की नींव रखी गई, जिसे ठीक चुनाव से पहले कांग्रेस भुनाने में जुट गई है।
भाजपा मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी पर निर्भर
वन रैंक वन पेंशन का कार्ड कांग्रेस मान रही है कि उसके सर्वाधिक फायदा देगा। हालांकि भाजपा ने यूपीए सरकार के इस फैसले की कमियों का पुलिंदा चुनाव प्रचार में पूर्व सैनिकों के सामने लाने की तैयारी की है।
कांग्रेस ने अपना पूर्व सैनिकों का समर्थन हासिल करने के लिए लेफ्टिनेंट जनरल टीपीएस रावत को वापस पार्टी में लिया है। लेफ्टिनेंट जनरल गंभीर सिंह नेगी कांग्रेस में पहले से सक्रिय हैं।
वहीं भाजपा पूरी तरह से पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी पर निर्भर कर रही है।
राज्य गठन के बाद दो लोकसभा चुनाव में भाजपा को सैनिकों के पोस्टल बैलेट का 80 फीसदी मिलता रहा है, जिसे खंडूड़ी की लोकप्रियता से जोड़ा जाता है। वहीं भाजपा ने वन रैंक वन पेंशन पर कांग्रेस को घेर रही है।
लोकसभा क्षेत्रों में पूर्व सैनिक व वीर नारियां
- अल्मोड़ा लोकसभा क्षेत्र में लगभग 64 हजार
- पौड़ी लोकसभा क्षेत्र में लगभग 49 हजार
- टिहरी लोकसभा क्षेत्र में लगभग 38 हजार
- नैनीताल लोकसभा क्षेत्र में लगभग 22 हजार
- हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र में लगभग 6 हजार
72 हजार सेना में कार्यरत
- टिहरी में 8511
- पौड़ी में 30789
- अल्मोड़ा में 16634
- नैनीताल में 6934
- हरिद्वार में 3949
- 30167 सैनिकों के साथ रहने वाले परिवारजनों के।
एक्स लाख एक्स पैरामिलिट्री की संख्या
राज्य में लगभग एक लाख अर्द्धसेना बलों से रिटायर जवान एवं अधिकारी हैं और 25 हजार असम राइफल्स, आईटीबीपी, सीआरपीएफ, बीएसफ आदि पैरामिलिट्री फोर्स का हिस्सा हैं।
अर्द्धसेना बलों को पूर्व सैनिकों की भांति लाभ देने के लिए राज्य सरकार के एक्स सेंट्रल फोर्सेस पर्सनल के तहत अर्द्धसैनिक बल कल्याण परिषद का गठन चुनाव से ठीक पहले इसी वोट बैंक को ध्यान में रखकर किया है।