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जब लड़ पड़े अर्जुन और हनुमान तब किसके संकट में आए प्राण

स्वामी रामसुखदास Updated Thu, 11 Jun 2015 08:17 AM IST
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finally loses devotion, not the devotee
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एक बार हनुमान और अर्जुन की भेंट हुई। हनुमान राम के भक्त थे, अर्जुन कृष्ण के। दोनों में बहस छिड़ गई। हनुमान जी कहने लगे, राम बली हैं, जबकि अर्जुन श्रीकृष्ण को बली बताते। बहस का अंत न होते देख परीक्षा करने का निश्चय हुआ, और शर्त तय हुई कि जो हारेगा, वह आत्महत्या करेगा।

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अर्जुन ने श्रीकृष्ण का ध्यान किया और समुद्र की सतह पर तीर छोड़ने लगे। उन्होंने उन तीरों से एक विशाल पुल बांध दिया। फिर अर्जुन ने हनुमान से कहा, तुम्हारे राम बली हैं, तो इस पुल को तोड़ दो। यदि न तोड़ सके, तो तुम्हें अपनी हार स्वीकार करनी होगी।
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हनुमान को अपनी भक्ति पर बड़ा गर्व था। वह पुल पर गए, और उस पर भार बढ़ाने के लिए अपने शरीर का विस्तार करने लगे। बढ़ाते-बढ़ाते उन्होंने अपने शरीर का विस्तार आकाश को छूने जैसा कर लिया। फिर वह पुल पर कूदने लगे।

कहते हैं कि हनुमान और अर्जुन की इस भिड़ंत से भगवान बहुत चिंतित हुए। वह यदि हनुमान की रक्षा करते हैं, तो अर्जुन का अंत होना तय था, और अर्जुन की रक्षा करने पर हनुमान का अंत। दोनों ही स्थिति में उन्हें अपनी भक्ति हारती दिखी। अंत में उन्होंने स्वयं ही अपना शरीर पुल के नीचे लगा दिया। हनुमान ने जैसे ही कदम बढ़ाया कि उनके भार से भगवान का शरीर फट गया और खून बहने लगा।

हनुमान जी ने राम को पहचाना। वह उनके पास पहुंचे, और दुख जताने लगे। अर्जुन ने कृष्णरूपी भगवान को पहचाना, तो वह भी दौड़कर विलाप करने लगे। भगवान ने दोनों से कहा, अच्छा होता कि आप लोग विवेक से काम लेते। मैं एक हूं, और मेरे ही अनेक रूप संसार में फैले हैं। इसलिए किसी से झगड़ा नहीं करना चाहिए। विवाद का हल विवेक से करना चाहिए।

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