{"_id":"6a20ead9d1c8a5c6c900def2","slug":"the-other-side-the-story-of-the-seat-of-love-and-its-magical-feelings-2026-06-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"दूसरा पहलू: ‘सीट ऑफ लव’ और उसके जादुई एहसास की कहानी","category":{"title":"Blog","title_hn":"अभिमत","slug":"blog"}}
दूसरा पहलू: ‘सीट ऑफ लव’ और उसके जादुई एहसास की कहानी
अमिताभ स.
Published by: Pavan
Updated Thu, 04 Jun 2026 08:33 AM IST
विज्ञापन
ताज परिसर में बनी ‘सीट ऑफ लव’ पर न केवल शाहजहां, बल्कि कई देशों के राजा-रानी, राष्ट्राध्यक्ष व अनेक हस्तियां भी बैठ चुकी हैं। पिछले साल अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी अपने परिवार के साथ ताजमहल पहुंचे थे और यहां तस्वीरें खिंचवाई थीं। करीब पौने चार सौ साल पुराने सफेद संगमरमर की बेंच को ‘सीट ऑफ लव’ का नाम देने के पीछे अहम वजह है। माना जाता है कि बेंच पर बैठते ही प्यार करने वाले जोड़ों में चाहत और बढ़ जाती है।
‘सीट ऑफ लव’ और उसके जादुई एहसास की कहानी
- फोटो : @JDVance/Instagram
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
बीते कुछ हफ्तों में, आगरा की तपती गर्मी के बावजूद अमेरिका के दो दिग्गज युगलों ने ताजमहल की ‘सीट ऑफ लव’ पर बैठ कर फोटो खिंचवाई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी टिफनी ट्रंप ने इसी शनिवार अपने पति माइकल बुलोस के साथ, और उससे 4-5 दिन पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी अपनी पत्नी के साथ सीट ऑफ लव पर बैठे हुए फोटो खिंचवाई। पिछले साल अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपनी पत्नी उषा वेंस और तीनों बच्चों के साथ यहां पहुंचे थे, और परिवार के साथ तस्वीरें खिंचवाई थीं।
ताज परिसर में बनी खासमखास ‘सीट ऑफ लव’ ताजमहल के एकदम सामने और बीचोंबीच बने सेंट्रल टैंक, यानी ताल के साथ बनी है। इसे लवर्स सीट, प्रीमियर सीट या वीआईपी बेंच के नाम से भी जाना जाता है। इस सीट पर केवल ताजमहल बनवाने वाले मुगल बादशाह शाहजहां ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों के राजा-रानी, राष्ट्राध्यक्ष और अनेक प्रसिद्ध हस्तियां भी बैठ चुकी हैं। यह ताजमहल वाले खास और सर्वश्रेष्ठ संगमरमर से बनी है। इस पर हुई नक्काशी भी ताज बनाने वाले माहिर कारीगरों के हाथों हुई बताते हैं।
करीब पौने चार सौ साल पुराने सफेद संगमरमर की बेंच को ‘सीट ऑफ लव’ का नाम देने के पीछे अहम वजह है। माना जाता है कि बेंच पर बैठते ही प्यार करने वाले जोड़ों में चाहत और बढ़ जाती है। गवाही के तौर पर, अक्सर प्रिंसेस लेडी डायना का वाकया सुनाया जाता है। 1992 में जब लेडी डायना ने इस सीट पर अकेले बैठकर तस्वीर खिंचवाई, तो ब्रिटिश मीडिया में खूब चर्चा हुई। लोगों ने इसे इस बात का संकेत माना कि उनके और प्रिंस चार्ल्स के रिश्तों में पहले जैसी नजदीकी और मधुरता नहीं रही थी। और सचमुच ऐसा हुआ भी। व्लादिमीर पुतिन, डोनाल्ड ट्रंप, बिल क्लिंटन, जॉन एफ कैनेडी, प्रिंस विलियम, इमैनुएल मैक्रों, जस्टिन ट्रूडो और परवेज मुशर्रफ अपनी-अपनी पत्नियों संग यहां फोटो खिंचवा चुके हैं।
विज्ञापन
इतिहास बताता है कि शाहजहां का निकाह अर्जुमंद बानो बेगम से 10 मई, 1612 को हुआ था। बाद में, उसनेे अर्जुमंद का नाम मुमताज महल रखा। 1632 और 1648 के बीच शाहजहां ने ताजमहल बनवाया। मुमताज को मौत के बाद यहीं दफन किया गया था। फिर, 1666 में मुमताज के बगल में शाहजहां की भी कब्र बनी। ताज और ‘सीट ऑफ लव’ का जलवा चांदनी रात में खासतौर से देखते ही बनता है।
ताज परिसर में बनी खासमखास ‘सीट ऑफ लव’ ताजमहल के एकदम सामने और बीचोंबीच बने सेंट्रल टैंक, यानी ताल के साथ बनी है। इसे लवर्स सीट, प्रीमियर सीट या वीआईपी बेंच के नाम से भी जाना जाता है। इस सीट पर केवल ताजमहल बनवाने वाले मुगल बादशाह शाहजहां ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों के राजा-रानी, राष्ट्राध्यक्ष और अनेक प्रसिद्ध हस्तियां भी बैठ चुकी हैं। यह ताजमहल वाले खास और सर्वश्रेष्ठ संगमरमर से बनी है। इस पर हुई नक्काशी भी ताज बनाने वाले माहिर कारीगरों के हाथों हुई बताते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
करीब पौने चार सौ साल पुराने सफेद संगमरमर की बेंच को ‘सीट ऑफ लव’ का नाम देने के पीछे अहम वजह है। माना जाता है कि बेंच पर बैठते ही प्यार करने वाले जोड़ों में चाहत और बढ़ जाती है। गवाही के तौर पर, अक्सर प्रिंसेस लेडी डायना का वाकया सुनाया जाता है। 1992 में जब लेडी डायना ने इस सीट पर अकेले बैठकर तस्वीर खिंचवाई, तो ब्रिटिश मीडिया में खूब चर्चा हुई। लोगों ने इसे इस बात का संकेत माना कि उनके और प्रिंस चार्ल्स के रिश्तों में पहले जैसी नजदीकी और मधुरता नहीं रही थी। और सचमुच ऐसा हुआ भी। व्लादिमीर पुतिन, डोनाल्ड ट्रंप, बिल क्लिंटन, जॉन एफ कैनेडी, प्रिंस विलियम, इमैनुएल मैक्रों, जस्टिन ट्रूडो और परवेज मुशर्रफ अपनी-अपनी पत्नियों संग यहां फोटो खिंचवा चुके हैं।
Trending Videos
इतिहास बताता है कि शाहजहां का निकाह अर्जुमंद बानो बेगम से 10 मई, 1612 को हुआ था। बाद में, उसनेे अर्जुमंद का नाम मुमताज महल रखा। 1632 और 1648 के बीच शाहजहां ने ताजमहल बनवाया। मुमताज को मौत के बाद यहीं दफन किया गया था। फिर, 1666 में मुमताज के बगल में शाहजहां की भी कब्र बनी। ताज और ‘सीट ऑफ लव’ का जलवा चांदनी रात में खासतौर से देखते ही बनता है।