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दूसरी पारी: आप जी रहे हैं या वक्त काट रहे हैं, बुढ़ापे में रचनात्मक और सुखमय जीवन जीना एक कला
अमर उजाला
Published by: Pavan
Updated Fri, 05 Jun 2026 07:09 AM IST
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दिल्ली के अमरकांत को जीवन में सकारात्मकता लाने के लिए मनोवैज्ञानिक नीलकंठ ने कुछ यों सलाह दी। वे बताते हैं- मेरी उम्र 65 वर्ष है। कभी-कभी जीवन को लेकर बड़ी नकारात्मकता हावी हो जाती है। क्या यह बढ़ती उम्र का तकाजा है? क्या करूं?
आप जी रहे हैं या वक्त काट रहे हैं
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
बुढ़ापे में रचनात्मक और सुखमय जीवन जीना एक कला है, जिसके लिए आम तौर पर गलत कदम उठाने से बचना जरूरी होता है। अगर बुजुर्ग लोग कुछ चीजें बिना सोचे-समझे करना छोड़ दें, तो यह दुनिया एक ज्यादा सुरक्षित जगह बन जाएगी। भले ही जिंदगी थोड़ी कम रोमांचक हो, लेकिन ज्यादा सुरक्षित होगी। जिस सामाजिक कार्य में जाने की इच्छा न हो, उसमें न जाएं। यदि आपके किसी प्रियजन का आत्मविश्वास डगमगा रहा हो, तो उससे यह कहना कि 'तुम यह कर सकते हो' बहुत मायने रखता है। इससे ज्यादा बेहतर तरीके से आप उसके प्रति अपना प्यार नहीं जता सकते। अपने एक निबंध में, वर्जीनिया वुल्फ एक पतंगे को अंतिम सांसें लेते हुए देखती हैं, जो एक छोटी-सी खिड़की के शीशे से टकरा रहा होता है। लेखिका उस जीव की दुर्दशा को विस्मय के साथ देखती हैं। उसका संघर्ष बेहद सुंदर है। जिस तरह पतंगा अपने जीवन के लिए अंतिम क्षण तक संघर्ष करता है, आप भी वैसा ही करें।
किसी के साथ अपनी निराशा न बांटें, अपने करीबी दोस्तों के साथ भी नहीं। बेशक वे आपके प्रति सहानुभूति रखते हों, लेकिन अपने किसी प्रियजन से बोझ उठाने की उम्मीद करना कुछ ज्यादा ही अपेक्षा करना है। यदि आप मोल-भाव करने में माहिर न हों, तो समझौता नहीं करें, क्योंकि यदि आप जरा-सा भी झुकते हैं, तो समझ लीजिए कि आपने सब कुछ गंवा दिया। हम सभी अक्सर अपनी जिंदगी में यह मानकर चलते हैं कि गलतियों से बचना चाहिए, लेकिन ऐसा ही होगा, यह जरूरी नहीं है। जैसे कि पियानो बजाते समय गलतियां होना तय है, ऐसे में गलती को सुधारने के लिए आप जानबूझकर एक और गलती करते हैं, ताकि किसी गलत चीज से कुछ सही बनाया जा सके। हो सकता है कि आपको लगे कि बेहतर यही होता कि आप शुरू में वह गलती करते ही नहीं। लेकिन, जैसा कि आपने खुद अनुभव किया होगा, एक 'रचनात्मक गलती' असल जिंदगी के ज्यादा करीब हो सकती है।
जैसे, आपने एक ऐसी नौकरी चुनी, जो आप नहीं करना चाहते थे, लेकिन बाद में पता चला कि वह नौकरी तो आपके लिए एकदम सही है। आपको लगेगा कि जिंदगी तो बस ऐसी ही 'रचनात्मक गलतियों' का मेल है। आप जितने बड़े होते जाते हैं, यह दुनिया उतनी ही ज्यादा आश्चर्यों से भरी हुई लगने लगती है। आप जिंदगी के एक मुश्किल दौर से गुजर रहे होते हैं, और आपको लगता है कि अब कोई राहत नहीं मिलेगी, तभी अचानक, कुछ ऐसा होता है, जिससे पल भर में आपका सारा दुख छूमंतर हो जाता है। इस रहस्य पर सवाल न उठाएं। बस शुक्रगुजार हो जाइए उस पल के लिए।
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जहां दुख है, वहीं सुख भी आ जाता है अद्भुत रूप से। भले ही आप किसी भी उम्र में हों, जिंदगी का लुत्फ उठाना न भूलिए। हर उम्र में जीवन मौके देते हैं। इस बात पर ध्यान दें कि आप किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अमरता की चाहत मत रखिए। आप जिस तरह के विचार दूसरों के लिए रखते हैं, वही आपके लिए हमेशा कायम रहता है। कवि फिलिप लार्किन कहते हैं : हममें से जो चीज बाकी रह जाएगी, वह है प्रेम। बस यही जीवन के लिए काफी है।
जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हर शुक्रवार इस पर आपको नया पढ़ने को मिलेगा। आप अपने विचार, अनुभव या समस्याएं edit@amarujala.com पर भेज सकते हैं, विशेषज्ञों की मदद से हम कोशिश करेंगे कि संवाद का पुल बन सके।
किसी के साथ अपनी निराशा न बांटें, अपने करीबी दोस्तों के साथ भी नहीं। बेशक वे आपके प्रति सहानुभूति रखते हों, लेकिन अपने किसी प्रियजन से बोझ उठाने की उम्मीद करना कुछ ज्यादा ही अपेक्षा करना है। यदि आप मोल-भाव करने में माहिर न हों, तो समझौता नहीं करें, क्योंकि यदि आप जरा-सा भी झुकते हैं, तो समझ लीजिए कि आपने सब कुछ गंवा दिया। हम सभी अक्सर अपनी जिंदगी में यह मानकर चलते हैं कि गलतियों से बचना चाहिए, लेकिन ऐसा ही होगा, यह जरूरी नहीं है। जैसे कि पियानो बजाते समय गलतियां होना तय है, ऐसे में गलती को सुधारने के लिए आप जानबूझकर एक और गलती करते हैं, ताकि किसी गलत चीज से कुछ सही बनाया जा सके। हो सकता है कि आपको लगे कि बेहतर यही होता कि आप शुरू में वह गलती करते ही नहीं। लेकिन, जैसा कि आपने खुद अनुभव किया होगा, एक 'रचनात्मक गलती' असल जिंदगी के ज्यादा करीब हो सकती है।
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जैसे, आपने एक ऐसी नौकरी चुनी, जो आप नहीं करना चाहते थे, लेकिन बाद में पता चला कि वह नौकरी तो आपके लिए एकदम सही है। आपको लगेगा कि जिंदगी तो बस ऐसी ही 'रचनात्मक गलतियों' का मेल है। आप जितने बड़े होते जाते हैं, यह दुनिया उतनी ही ज्यादा आश्चर्यों से भरी हुई लगने लगती है। आप जिंदगी के एक मुश्किल दौर से गुजर रहे होते हैं, और आपको लगता है कि अब कोई राहत नहीं मिलेगी, तभी अचानक, कुछ ऐसा होता है, जिससे पल भर में आपका सारा दुख छूमंतर हो जाता है। इस रहस्य पर सवाल न उठाएं। बस शुक्रगुजार हो जाइए उस पल के लिए।
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जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हर शुक्रवार इस पर आपको नया पढ़ने को मिलेगा। आप अपने विचार, अनुभव या समस्याएं edit@amarujala.com पर भेज सकते हैं, विशेषज्ञों की मदद से हम कोशिश करेंगे कि संवाद का पुल बन सके।