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देव की डायरी: देश दौड़ रहा है, बस आगे नहीं बढ़ रहा
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ट्रेडमिल पर दौड़ते चेट्टी जी उस समाज का प्रतीक हैं जो लगातार व्यस्त तो दिखता है, लेकिन वास्तविक बदलाव और प्रगति की दिशा में बहुत कम आगे बढ़ पाता है। जिम, प्रोटीन शेक, फिटनेस ऐप और सेल्फी के बीच यह रचना सवाल उठाती है कि क्या केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों और दिखावटी सक्रियता से देश का विकास संभव है?
राष्ट्र निर्माण जारी है...
- फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार
काम चलता रहेगा। और राष्ट्र निर्माण? वह पूरे तो जोर शोर से जारी है।
मेरे पड़ोसी चेट्टी जी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वे ट्रेडमिल पर रोज पांच किलोमीटर दौड़ते हैं। पांच दिन से दौड़ रहे हैं। अभी तक वहीं हैं। ट्रेडमिल भी वहीं है।
मैंने कहा, "कुछ आगे बढ़ने का विचार है?"
बोले, "देश में कौन आगे बढ़ रहा है? सब अपनी अपनी ट्रेडमिल पर दौड रहे हैं।"
उनकी बात सुनकर मैं चुप हो गया। मेरे मोहल्ले में ढेर सारे 'चेट्टी जी' हैं। आपको भी अपने मोहल्ले में मिल जाएंगे।
अब हाल यह है कि सुबह और शाम पार्कों और जिमों में मुझे राष्ट्र निर्माण का विराट दृश्य दिखाई देता है। कोई पेट घटा रहा है। कोई कमर नाप रहा है। कोई सेल्फी ले रहा है। कोई प्रोटीन शेक पी रहा है। और सबको विश्वास है कि वे देश को बेहतर बना रहे हैं। एक हाथ में डम्बल है, दूसरे हाथ में पराठा।
कंधे पर प्रोटीन पाउडर है और जेब में गैस की दवा। फेफडों में प्रदूषण है, मोबाइल में फिटनेस ऐप है और चेहरे पर आत्मविश्वास कि देश सही दिशा में जा रहा है। हम जैसे मध्यमवर्ग को पूरा भरोसा है कि जिस दिन घी और प्रोटीन पाउडर मिलकर आत्मनिर्भर हो जाएंगे, उस दिन भारत सचमुच विश्वगुरु बन जाएगा। तब तक राष्ट्र निर्माण जारी रहे, ऐसा विचार है।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
मेरे पड़ोसी चेट्टी जी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वे ट्रेडमिल पर रोज पांच किलोमीटर दौड़ते हैं। पांच दिन से दौड़ रहे हैं। अभी तक वहीं हैं। ट्रेडमिल भी वहीं है।
मैंने कहा, "कुछ आगे बढ़ने का विचार है?"
बोले, "देश में कौन आगे बढ़ रहा है? सब अपनी अपनी ट्रेडमिल पर दौड रहे हैं।"
उनकी बात सुनकर मैं चुप हो गया। मेरे मोहल्ले में ढेर सारे 'चेट्टी जी' हैं। आपको भी अपने मोहल्ले में मिल जाएंगे।
अब हाल यह है कि सुबह और शाम पार्कों और जिमों में मुझे राष्ट्र निर्माण का विराट दृश्य दिखाई देता है। कोई पेट घटा रहा है। कोई कमर नाप रहा है। कोई सेल्फी ले रहा है। कोई प्रोटीन शेक पी रहा है। और सबको विश्वास है कि वे देश को बेहतर बना रहे हैं। एक हाथ में डम्बल है, दूसरे हाथ में पराठा।
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कंधे पर प्रोटीन पाउडर है और जेब में गैस की दवा। फेफडों में प्रदूषण है, मोबाइल में फिटनेस ऐप है और चेहरे पर आत्मविश्वास कि देश सही दिशा में जा रहा है। हम जैसे मध्यमवर्ग को पूरा भरोसा है कि जिस दिन घी और प्रोटीन पाउडर मिलकर आत्मनिर्भर हो जाएंगे, उस दिन भारत सचमुच विश्वगुरु बन जाएगा। तब तक राष्ट्र निर्माण जारी रहे, ऐसा विचार है।
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