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चिकित्सकों और पैरामेडिकल के प्रशिक्षण के लिए एक करोड़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 12 Dec 2013 04:27 PM IST
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चिकित्सकों और पैरामेडिकल कर्मचारियों की कार्य कुशलता में सुधार के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम योजना के तहत राज्य सरकार ने एक करोड़ जारी किए हैं।
हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री राव नरेंद्र सिंह ने बताया कि चिकित्सकों और पैरामेडिकल कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की योजना के तहत चालू वित्त वर्ष में एक करोड़ का प्रावधान किया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि योजना के तहत चिकित्सक प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत दो वर्ष में एक बार किसी राष्ट्रीय सम्मेलन, कार्यशाला या सेमिनार में शामिल हो सकते हैं।
तीन वर्षों में एक बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे कार्यक्रम में हिस्सा ले सकते हैं। चालू वित्त वर्ष के दौरान योजना का लाभ उठाने के लिए सभी चिकित्सक तथा पैरा मेडिकल कर्मचारी आवेदन कर सकते हैं।
ऐसे किसी सम्मेलन, कार्यशाला या सेमिनार में शामिल होने पर चिकित्सकों को पाठ्यक्रम एवं पंजीकरण शुल्क के रूप में विभाग द्वारा 10 हजार रुपये तक की राशि प्रतिपूर्ति की जाएगी। उन्हें यात्रा भत्ता तथा दैनिक भत्ता भी दिया जाएगा।
इसके अलावा, उनकी प्रशिक्षण अवधि को सेवा अवधि का हिस्सा माना जाएगा। हालांकि, ऐसे किसी प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए चिकित्सकों को प्रशासनिक विभाग से पूर्व अनुमति लेनी होगी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम की अवधि दो महीने से अधिक नहीं होनी चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि विभाग द्वारा जिला अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों के लिए अस्पतालों के पुस्तकालयों में पाठ्य पुस्तकें एवं अन्य अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध करवाई की जा रही है। जिससे कर्मचारी बदलते परिदृश्य के अनुरूप अपडेट होते रहें।
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हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री राव नरेंद्र सिंह ने बताया कि चिकित्सकों और पैरामेडिकल कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की योजना के तहत चालू वित्त वर्ष में एक करोड़ का प्रावधान किया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि योजना के तहत चिकित्सक प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत दो वर्ष में एक बार किसी राष्ट्रीय सम्मेलन, कार्यशाला या सेमिनार में शामिल हो सकते हैं।
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तीन वर्षों में एक बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे कार्यक्रम में हिस्सा ले सकते हैं। चालू वित्त वर्ष के दौरान योजना का लाभ उठाने के लिए सभी चिकित्सक तथा पैरा मेडिकल कर्मचारी आवेदन कर सकते हैं।
ऐसे किसी सम्मेलन, कार्यशाला या सेमिनार में शामिल होने पर चिकित्सकों को पाठ्यक्रम एवं पंजीकरण शुल्क के रूप में विभाग द्वारा 10 हजार रुपये तक की राशि प्रतिपूर्ति की जाएगी। उन्हें यात्रा भत्ता तथा दैनिक भत्ता भी दिया जाएगा।
इसके अलावा, उनकी प्रशिक्षण अवधि को सेवा अवधि का हिस्सा माना जाएगा। हालांकि, ऐसे किसी प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए चिकित्सकों को प्रशासनिक विभाग से पूर्व अनुमति लेनी होगी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम की अवधि दो महीने से अधिक नहीं होनी चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि विभाग द्वारा जिला अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों के लिए अस्पतालों के पुस्तकालयों में पाठ्य पुस्तकें एवं अन्य अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध करवाई की जा रही है। जिससे कर्मचारी बदलते परिदृश्य के अनुरूप अपडेट होते रहें।