रेडक्रास सोसाइटी में 40 लाख का घोटाला
इंडियन रेड क्रास सोसाइटी की चंडीगढ़ शाखा में लाखों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। जो पैसा गरीबों पर खर्च होना चाहिए था वह रेड क्रास के कर्मचारियों की जेबों में चला गया।
फिलहाल 40 लाख से अधिक के घपले का पता चला है और उ मीद है कि इस मामले की आगे जांच होने पर यह एक करोड़ से ऊपर का हो सकता है।
रेड क्रास फंड का घपला करने के लिए बैंक वाउचर तो तैयार किए गए, लेकिन बैंक में पैसे जमा नहीं हुए। कर्मचारियों ने बिना उच्च अधिकारियों की मंजूरी के रेड क्रास सोसाइटी की दो फिक्स्ड डिपॉजिट समय पूरा होने से पहले ही तुड़वा दिए गए।
यह गड़बड़ी रेड क्रास के दो कर्मचारियों ने की जिनमें से एक कुछ माह पहले बर्खास्त किया जा चुका है।
रैंडम चैकिंग में खुलासा हुआ घपले का
चंडीगढ़ के उपायुक्त और रेड क्रास सोसाइटी के चेयरमैन मोहम्मद शाइन को जब इस घपले से संबंधित शिकायत मिली तो उन्होंने एक चार्टेड अकाउंटेंट से रैंडम बेसिस पर रेड क्रास सोसाइटी के पिछले दस सालों के अकाउंट्स की जांच करने को कहा।
चार्टेड अकाउंटेंट ने जब रैंडम चेकिंग की तो बड़े स्तर पर गड़बड़ी मिली। अब उन्होंने अपनी रिपोर्ट में न सिर्फ इसका ऑडिट कराने को कहा है बल्कि अकाउंट्स का कंप्यूटराइजेशन कराने के लिए भी सिफारिश की है। रेड क्रास सोसाइटी गरीबों की मदद करती है और इसके लिए उन्हें खुद ही फंड एकत्र करने होते हैं।
पहले भी पकड़ा गया है घोटाला
इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी में हुए पहले भी घोटाले हुए हैं। कुछ महीने पहले इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी के अकाउंटेंट ज्योति खनल और सीनियर क्लर्क रविंदर वर्मा की सेवाएं समाप्त की गई थीं। जांच में अकाउंटेंट को कैश जमा कराने में देरी करने और सीनियर क्लर्क को सप्लाई का पूरा रिकार्ड न रखने का दोषी पाया गया था।
यह मिली गड़बड़ी
-वर्ष 2005-06 की लैजर बुक में फार्म की बिक्री की एक ही तारीख में 25 लाख रुपये से अधिक की एंट्री कर दी। हर माह की एंट्री नहीं की गई। इससे फार्म की बिक्री से हुई आमदनी की राशि में घोटाला किया गया।
-वर्ष 2005-06 में तीन अलग अलग महीने के स्टेट बैंक ऑफ पटियाला के 1200 से अधिक वाउचर्स रिकार्ड में जमा हैं। लेकिन, जब बैंक से स्टेटमेंट ली गई तो पता चला कि इन तीन महीनों में बैंक में कोई पैसे जमा ही नहीं हुआ। ऐसे में 1.60 लाख रुपये की गड़बड़ी की गई।
-नियमों के अनुसार रेड क्रास सोसाइटी सिर्फ दो हजार कैश अपने हाथ में रख सकती है लेकिन, वर्ष 2012-13 में लाखों का कैश कर्मचारियों के पास रहा।
-रेड क्रास कैंटीन ने मासिक रेंट देने में विलंब किया। लेकिन, कैंटीन मालिक पर जुर्माना नहीं लगा।
-जम्मू एंड कश्मीर बैंक में भी 20 हजार रुपये का चेक जमा करने का वाउचर बना। लेकिन, बैंक में पैसे जमा नहीं हुए।
-सिंडीकेट बैंक की 18.21 लाख और 10.86 लाख रुपये की एफडी बिना मंजूरी लिए समय से पहले तुड़वा दी गई।