ज्योति मर्डरः विधायक का बयान चौंकाने वाला
ज्योति हत्याकांड मामले में आरोपी दून के विधायक रामकुमार चौधरी को शनिवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रूपम सिंह की अदालत में पेश किया गया। विधायक ने सीआरपीसी की धारा 313 के तहत अदालत में बयान दर्ज कराए।
रामकुमार ने खुद पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसकी आईडी पर जो मोबाइल नंबर चल रहा था, उसे दोनों ड्राइवर इस्तेमाल करते थे। उसने ज्योति के चरित्र पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उसकी कई लोगों से जान पहचान थी और हत्या में किसी का हाथ हो सकता है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए सात जुलाई की तारीख तय की है।
मोबाइल टावर लोकेशन को आधार माना
शनिवार को अदालत में ज्योति हत्याकांड की सुनवाई हुई। इस हत्याकांड में पुलिस शुरुआत से ही मोबाइल टावर लोकेशन को आधार मान रही है। विधायक ने कोर्ट में कहा कि उसके ड्राइवर मोनू और सतपाल के पास मोबाइल नंबर-9216044340 होता था, जिसका सिम रामकुमार चौधरी के नाम से जारी कराया गया था।
पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक जिस रात ज्योति की हत्या हुई थी, उस रात 9816044340 और 9816464060 के मोबाइल लोकेशन लगातार बदल रहे थे। दूसरा नंबर विधायक की फर्जी आईडी पर खरीदा गया था।
हत्या में कोई भी शामिल हो सकता है
घटना की रात दोनों मोबाइल की लोकेशन घटनास्थल के आसपास थी। विधायक ने मोबाइल नंबर 9846464060 के बारे में कहा कि उन्हें नहीं पता कि यह नंबर किसके पास था और इस नंबर का इस्तेमाल कौन कर रहा थ, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। इस नंबर का उन्होंने कभी इस्तेमाल नहीं किया।
रामकुमार चौधरी ने ज्योति की जान पहचान कई लोगों से थी और ऐसे में उसकी हत्या में कोई भी शामिल हो सकता है। गवाह अनिल कुमार ने ज्योति को एक सिम कार्ड दिया था, जिसकी पुष्टि गवाह सुमित हंस उर्फ सन्नी भी कर चुके हैं।
ज्योति से कोई रिश्ता नहीं
विधायक ने कहा कि डीएसपी वीरेन्द्र सांगवान या कोई और जांच अधिकारी सहित ज्योति के पिता बूटी राम या बहन ईशू रानी भी अब तक ज्योति की कमाई के स्रोत के बारे में कुछ नहीं बता सके हैं।
ज्योति के मोबाइल नंबर पर हत्या के दिन (21 नवंबर, 2012) आखिरी कॉल किसने की या ज्योति ने इस नंबर से आखिरी कॉल किसे की इसका पता किया जाए ताकि हत्यारोपी तक पहुंचा जा सके। विधायक ने कहा कि उनका न तो ज्योति से कोई रिश्ता था और न ही उन्होंने उससे कभी शादी का वादा किया था।
कुलदीप कौर के साथ हुई थी शादी
विधायक ने बयान में कहा कि 1996 में कुलदीप कौर के साथ उनकी शादी हुई थी और उनके दो बच्चे हैं। ज्योति से शादी के बारे में उन पर लगाए गए आरोप झूठे हैं। ज्योति की बहन ईशू की ओर से विधायक पर लगाए गए ज्योति के रिश्ते के बारे में उन्होंने कहा कि एसआईटी के समक्ष वह एक गवाह के तौर पर थी, जिसके बयानों पर विश्वास नहीं किया जा सकता है।
चौधरी ने अदालत में कहा कि 9816044340 का इस्तेमाल उसके दोनों ड्राइवर करते थे। 21 नवंबर को भी ड्राइवर सतपाल इस मोबाइल को लेकर कहीं और था, जबकि वह 20-21 नवंबर की रात हरिपुर संधोली, बद्दी में अपने घर पर थे। मौका ए वारदात से मिले सबूतों को अब तक सिद्ध नहीं किया जा सका है।
ये थे मुख्य गवाह और पुख्ता सबूत
ज्योति की बहन और पिता बूटी राम। ज्योति की बहन कोर्ट में बयान दे चुकी है कि ज्योति ने उसे बताया था कि रामकुमार चौधरी के साथ उसके संबंध हैं और दोनों शादी करेंगे। वहीं, बूटी राम ने भी कोर्ट में ज्योति और रामकुमार के रिश्ते के बारे में बताया था।
मोबाइल की लोकेशन
ज्योति, रामकुमार व अन्य आरोपियों के मोबाइल वारदात वाले दिन साथ चल रहे थे। टावर लोकेशन के डिकोडेड डाटा में भी साफ हो गया है कि चंडीगढ़ से पंचकूला तक किस-किस टावर पर कैसे-कैसे नंबर एक साथ चले। कौन किस टावर से कहां तक पहुंचा।
चंडीमंदिर टोल प्लाजा की डिटेल्स
इसमें स्पष्ट है कि वारदात वाली रात वह ट्रक पंचकूला में आया था, जिससे ज्योति का सिर कुचला गया था।
चौधरी के हस्ताक्षर
ज्योति का गर्भपात कराने के लिए मंजूरी फार्म पर साइन किए गए थे। ये साइन रामकुमार चौधरी के साइन थे, जो मैच हो चुके हैं।
ज्योति की कॉल डिटेल्स
हत्या के बाद डाटा डिलीट कर ज्योति के मोबाइल को फेंक दिया गया था। घग्गर नदी से मोबाइल रिकवर होने के बाद डाटा को रिट्राइव कराने पर पाया गया कि रामकुमार ने एक बार दो दिन में ज्योति को 40 फोन किए थे। ज्योति के मोबाइल से रामकुमार और उनकी पत्नी व एक जन्मदिन पार्टी की तस्वीरें भी रिट्राइव हो चुकी है।
एसएमएस
ज्योति के फोन से पुलिस को उसके नजदीकी दोस्त सिमी का पता चला। सिमी ने ज्योति को काफी एसएमएस कर रखे हैं। इनमें कुछ ऐसे एसएमएस हैं, जिनमें जिक्र है कि वह किसी और के लिए उसे छोड़ रही है। सिमी ने कोर्ट में बयान दिए हैं कि ज्योति ने उसे कहा था कि वह चौधरी के साथ है, जो उसकी काफी मदद करता है।
केस में अब तक ये हुआ
- 22 नवंबर 2012 को सेक्टर-21 में ज्योति का मिला था शव
- सेक्टर-5 थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज हुआ
- हिमाचल के कांग्रेसी नेता रामकुमार चौधरी का नाम केस में आया
- पुलिस ने कई बार रेड की, लेकिन चौधरी नदारद
- 8 जनवरी को चौधरी ने कोर्ट में सरेंडर किया, पुलिस ने लिया हिरासत में
- इसके बाद अन्य आरोपियों की गिरफ्तारियां हुई
- पुलिस ने चार्जशीट तैयार की, जिस पर 37 आब्जेक्शन लगे
- जांच अधिकारी को हटाकर तत्कालीन डीसीपी अश्विन शेणवी की अगुवाई में एसआईटी बनी
- फिर कोर्ट में नया चालान आया और ट्रायल शुरू हुआ। इस दौरान सप्लीमेंटरी चालान भी आते रहे।
यह था ज्योति की हत्या का मामला
21-22 नवंबर 2012 में ज्योति की हत्या के बाद उसका शव सेक्टर-21 में फेंक दिया गया था। बूटी राम की शिकायत पर 22 नवंबर 2012 को सेक्टर-पांच थाने में विधायक सहित 12 लोगों के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। आठ जनवरी 2013 को विधायक रामकुमार ने कोर्ट में सरेंडर किया था। बूटी राम के वकील जितेन्द्र सहरावत ने बताया कि चूंकि विधायक से जुड़ा यह मामला है। उनके राजनीतिक प्रभाव में आकर कुछ लोगों ने शिकायतकर्ता को धमकियां दी हैं, जिनके खिलाफ शिकायत दी गई।