कोटे के शिक्षकों की ट्रेनिंग की बात पर स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज में तनाव
- कॉलेज प्रबंध समिति की 27 अप्रैल की बैठक में लाया जा रहा प्रस्ताव
- वही एक अन्य दलित शिक्षक ने हिंदू कॉलेज प्रशासन पर लगाया प्रताड़ना का आरोप
विस्तार
स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज में कोटे के शिक्षकों की ट्रेनिंग कराने के कथित प्रस्ताव के चलते कॉलेज का माहौल गर्मा गया है। कई शिक्षक इसके विरोध में उतर आए हैं। अभी इस तरह की कोई बात सामने नहीं आई है मगर कहा जा रहा है कि 27 अप्रैल को होने वाली कॉलेज प्रबंध समिति की बैठक में ऐसा प्रस्ताव लाया जा रहा है।
श्रद्धानंद कॉलेज में एससी - एसटी - ओबीसी फोरम फॉर टीचिंग एंड नॉन टीचिंग स्टाफ ने बैठक के एजेंडे की जो प्रति मुहैया कराई है उसमें ट्रेनिंग की बात भी है, जिसपर फोरम ने कड़ी आपत्ति जताई है।
शिक्षकों का कहना है कि इस तरह से कोटे के शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता पर प्रश्न चिन्ह लगाया जा रहा है। कॉलेज के प्रिंसिपल पंकज भान ने स्वीकार किया कि एजेंडे में कोटे के शिक्षकों को एजूकेशन देने की बात शामिल है।
कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर सूरज यादव का कहना है कि समिति कोषाध्यक्ष की ओर से लाया जा रहा है यह प्रस्ताव काफी हैरान करने वाला है। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षक नेट पास व पीएचडी होते हैं। उनकी नियुक्ति में सभी प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। उनकी ट्रेनिंग कराने की बात कहना बड़ा ही अजीब है।
‘दलित हूं इसलिए मजबूर कर रहे हैं’
इधर हिंदू कॉलेज के एक शिक्षक ने कॉलेज प्रशासन पर आरोप लगाया है कि दलित होने के कारण उन्हें तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर घर खाली करने के लिए मजूबर किया जा रहा है। इतिहास विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रतनलाल का आरोप है कि उन्हें घर से निकालने की साजिश की जा रही है।
वह बीते कई वर्षों से कॉलेज परिसर में आवंटित घर में ही रहते हैं। अब बीते छह माह से उन पर घर खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है। कॉलेज परिसर में स्थित उनके घर के ठीक पास कंपोस्ट प्लांट के नाम पर 20 फीट चौड़ा व 20 फीट लंबा और 12 फीट गहरा गड्ढा बनाया गया है।
इसमें बड़ी संख्या में सूखी पत्तियां डाली जा रही हैं। पास ही में केमिस्ट्री लैब और स्टोर रूम है। यदि कोई केमिकल रिएक्शन होता है तो वहां आग लग सकती है। ऐसे में उन्हें डर है कि उनका परिवार इसकी चपेट में आ सकता है। उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस से भी की है।