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वो एंटीना, जिसने पहली बार दुनिया के सबसे बड़े जहाज टाइटैनिक के डूबने का दिया था संदेश
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Thu, 30 Jan 2020 08:20 PM IST
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सिग्नल हिल और टाइटैनिक
- फोटो : Social media
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आज हम मोबाइल पर हजारों मील दूर बैठे लोगों से बात कर लेते हैं। वायरलेस सेट के जरिए बिना तार के दूसरों से संपर्क कर लेते हैं। करोड़ों किलोमीटर दूर स्थित अंतरिक्ष यानों से संपर्क साध लेते हैं। क्या आपको पता है कि बिना तार के संदेश भेजने का ये सिलसिला किसकी देन है? आपका जवाब होगा गुल्येल्मो मारकोनी। जी हां, आप का जवाब बिल्कुल सही है। मारकोनी ही वो शख्स थे, जिन्होंने बिना तार के संदेश दूर-दूर तक भेजने की तकनीक ईजाद की थी। उन्होंने ही रेडियो टेलीग्राफ की शुरुआत की थी।
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गुल्येल्मो मारकोनी
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मारकोनी इटली के बोलोना शहर के रहने वाले थे, जिन्होंने बेतार के तार यानी रेडियो टेलीग्राफ की खोज की थी। पहली बार अटलांटिक महासागर के आर-पार रेडियो संदेश आज से 119 साल पहले यानी 1901 में भेजे गए थे। ये संदेश इंग्लैंड के तट पर स्थित पोल्ढू नाम की जगह से कनाडा के सेंट जॉन्स नाम के शहर के पास स्थित एक टीले पर भेजे गए थे।
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सिग्नल हिल, कनाडा
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मारकोनी बरसों से बेतार के संदेश भेज रहे थे। आखिर में उन्होंने अटलांटिक महासागर के आर-पार रेडियो संदेश भेजने की तकनीक परखने का फैसला किया। इसके लिए कनाडा के सेंट जॉन्स में समुद्र किनारे स्थित एक टीले को चुना गया। तेज हवाओं और भयंकर सर्दी के बीच मारकोनी ने अपना बड़ा-सा यंत्र सेंट जॉन्स में सिग्नल हिल नाम की पहाड़ी पर लगाया। पहाड़ी का ये नाम मार्कोनी के यहां रेडियो टेलीग्राफ का तजुर्बा करने की वजह से ही पड़ा है।
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सिग्नल हिल, कनाडा
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उत्तरी अटलांटिक महासागर स्थित इस ठिकाने को मार्कोनी ने बहुत सोच-समझकर चुना था। वो चाहते थे कि इंग्लैंड के पार अमरीकी महाद्वीप में एक ऐसा ठिकाना हो, जो इंग्लैंड से करीब हो। इंग्लैंड से करीब होने का मतलब वो महाद्वीप का सबसे पूर्वी हिस्सा हो। हालांकि सेंट जॉन्स वो जगह नहीं है। मगर आखिर में मार्कोनी को ये जगह जंच गई। उधर इंग्लैंड के पोल्ढू में वैज्ञानिक रोजाना अपनी मशीनें लगाकर संदेश भेजते थे।
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सिग्नल हिल, कनाडा
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इधर सेंट जॉन्स में मार्कोनी ने बहुत मशक्कत के बाद अपना एंटीना लगाने में कामयाबी हासिल की। इस दौरान इंग्लैंड से रोजाना मार्कोनी को रेडियो संदेश भेजे जाते थे। आखिर में मार्कोनी अपने तजुर्बे में कामयाब हुए। दिसंबर 1901 को इंग्लैंड से भेजा गया इलेक्ट्रो मैग्नेटिक संदेश, अटलांटिक के पार मार्कोनी के सिग्नल हिल स्थित एंटीना के जरिए पहुंच गया। ये बहुत बड़ी कामयाबी थी। इसने दुनिया में संचार के मोर्चे पर इंकलाब ला दिया। आज हम बिना तार के जिस तरह से भी संदेश भेजते हैं, उसकी बुनियाद मार्कोनी के उस तजुर्बे से ही पड़ी थी। इस प्रयोग के सफल रहने के बाद मार्कोनी को 1909 में नोबेल पुरस्कार भी मिला था।
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