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PAK की मध्यस्थता पर सवाल: ट्रंप के करीबी सीनेटर ने कहा- इस्राइल से दुश्मनी का भाव रखता है, ईरान की मदद भी की

वाशिंगटन डीसी, एएनआई Published by: रिया दुबे Updated Wed, 27 May 2026 07:41 AM IST

सार

अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने अमेरिका-ईरान वार्ता में पाकिस्तान की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस्राइल विरोधी रुख और ईरानी विमानों को लेकर चिंता जताई। आइए विस्तार से जानते हैं। 
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लिंडसे ग्राहम पाकिस्तान को लेकर क्या बोले? - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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अमेरिका और ईरान के बीच संभावित सीजफायर वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की निष्पक्षता पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस्राइल के प्रति पाकिस्तान की पुरानी दुश्मनी उसे मध्यस्थ की भूमिका के लिए समस्याग्रस्त बनाती है।

ग्रहाम ने कौन सा मुद्दा उठाया?

ग्रहाम ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरानी सैन्य विमानों को पाकिस्तान के एयरबेस पर जगह दी जा रही है। उन्होंने पाकिस्तान के वरिष्ठ नेताओं के इस्राइल विरोधी बयानों को भी बेहद परेशान करने वाला बताया।

पाकिस्तान की भूमिका पर क्या बोले?

उन्होंने लिखा कि काफी समय से मुझे लगता रहा है कि पाकिस्तान का मध्यस्थ बनना बेहद समस्याग्रस्त है। इस्राइल के प्रति उनकी दुश्मनी पुरानी है। यह भी साफ है कि ईरानी सैन्य विमान पाकिस्तान के एयरबेस पर मौजूद हैं और पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं के बयान बेहद चिंताजनक हैं।

पाकिस्तान ने ठुकराया अमेरिका का अब्राहम समझौता

यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें पाकिस्तान से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने को कहा गया था। पाकिस्तानी चैनल समा टीवी को दिए इंटरव्यू में आसिफ ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर मुझे नहीं लगता कि हमें ऐसे किसी समझौते में शामिल होना चाहिए जो हमारी मूल विचारधारा से टकराता हो।

पाकिस्तान ने इस्राइल पर जताया अविश्वास

उन्होंने इस्राइल पर अविश्वास जताते हुए कहा कि आप उन लोगों के साथ कैसे बैठ सकते हैं जिनकी बात पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता? आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान का इस मुद्दे पर रुख हमेशा साफ रहा है। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान की पासपोर्ट नीति का भी जिक्र किया और कहा कि हम शायद दुनिया का इकलौता देश हैं जिसके पासपोर्ट में इस्राइस का नाम तक नहीं होता।

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इसके बाद लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान से ट्रंप की अपील पर तत्काल अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि भले ही रक्षा मंत्री का बयान पुराना हो, लेकिन उसकी भावना आज भी कायम दिखती है।

क्या है अब्राहम समझौते का मामला?

दरअसल, ट्रंप ने हाल ही में कई मुस्लिम और अरब देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि ईरान के साथ संभावित समझौते के बाद पश्चिम एशिया में ऐतिहासिक बदलाव संभव है।

ट्रूथ सोशल पर एक लंबे पोस्ट में ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ बातचीत अच्छी दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो क्षेत्र में संघर्ष और बड़ा हो सकता है। ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन जैसे देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने की अपील की थी।

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बता दें कि अब्राहम अकॉर्ड्स 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता में हुआ एक समझौता है, जिसके तहत इस्राइस और कई अरब देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध सामान्य हुए थे।

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