रुड़की। उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस को लेकर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि राज्य निर्माण में शहीदों और मातृशक्ति का बलिदान अतुृल्य रहा है। इस मौके पर जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए, वहीं दूसरी ओर रामपुर और मसूरी हत्याकांड के दोषियों को सजा न मिलने की टीस भी साफ दिखाई दी।
शुक्रवार को उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संघर्ष समिति की ओर से उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस की 18वीं वर्षगांठ अशोकनगर में धूमधाम के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की आराधना, मंगल गीत एवं आरती के साथ किया गया। इस दौरान मुख्य अतिथि व विधायक प्रदीप बत्रा ने कहा कि उत्तराखंड स्थापना दिवस को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाना चाहिए। उत्तराखंड बनने के बाद राज्य में विकास की धारा बह रही है। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संघर्ष समिति के केंद्रीय अध्यक्ष हर्ष प्रकाश काला ने कहा कि 18 वर्ष पूरे होने के बाद भी कई सवाल आज भी त्यों के त्यों हैं क्योंकि एक-दो अक्तूबर 1994 को रामपुर तिराहा, 1994 के खटीमा कांड व 1994 के ही मसूरी कांड के दोषियों को अभी तक सजा नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि राज्य की मांग विकास के लिए की गई थी, विनाश के लिए नहीं। इस दौरान बहादुर सिंह रावत, बसपा नेता रविंद्र पनियाला, कमला बमोला, जीवानंद बुड़ाकोटी, चक्रधर देवरानी, विजय पंवार, राकेश भट्ट, लक्ष्मी प्रसाद सती, चंद्र मोहन जोशी, टीआर शर्मा, संग्राम सिंह रावत, सच्चिदानंद ध्यानी आदि मौजूद रहे। वहीं दूसरी ओर राज्य आंदोलनकारी समिति के बैनर तले सनराइज पब्लिक स्कूल अशोक नगर में उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस केक काटकर मनाया गया। इस अवसर पर सर्वप्रथम शहीदों को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। उसके बाद रुड़की के सबसे बुजुर्ग आंदोलनकारियों चंद्रमा देवी व राम सिंह रावत व जसवंती देवी ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने शहीदों एवं मातृशक्ति के बलिदान को उत्तराखंड निर्माण में अहम भूमिका के लिए उनका आभार जताया। कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर सतीश नेगी, नरेंद्र गोसाई, विनोद नेगी, मंदोदरी देवी, पार्वती रावत, रितिका, ज्योति, पितांबर ध्यानी, राजेंद्र नेगी, जगदीश व आनंद सिंह रावत आदि मौजूद रहे।