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हंसराज के सुरों पर जमकर झूमे दर्शक

ब्यूूराो/ अमर उजाला, हरिद्वार Updated Wed, 06 Apr 2016 01:14 AM IST
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हरिद्वार। जाने माने सूफी गायक हंसराज हंस की आवाज का जादू मंगलवार की रात हरिद्वार में संगीत प्रेमियों के सिर चढ़कर बोला। दिल टोटे-टोटे हो गया, दिल चोरी साडा हो गया.. जैसे लोकप्रिय गानों पर दर्शक देर तक झूमते रहे। हंसराज हंस को सुनने के लिए भारी तादाद में उमड़े श्रोताओं ने भीड़ के अब तक के सारे रिकार्ड भी तोड़ डाले।
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फिल्मों और कई एलबमों में अपनी आवाज का जादू बिखेर चुके इस फनकार की नाइट करीब डेढ़ घंटे बाद देरी से शुरु हो पाई। उन्होंने सूफी कलाम पेश करते हुए गाया कि दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहां होता है तो पंडाल में बैठा हर श्रोता झूमता नजर आया। इसके बाद ....मोसे नैना मिलाइके पर भी श्रोता देर तक झूमते रहे।
..मेरा यार दिलदार बड़ा सोणा खाली दिल नयो जान भी है मंगदा.. इश्क की गलीबिच कोई-कोई लंघदा, और दिल चोरी साडा हो गया, सीली सीली आंदी है हवा.. समेत दर्जनों प्रस्तुतियां देकर उन्होंने श्रोताओं का खूब मनोरंजन किया। खचाखच भरे पंडाल में भीड़ का आलम यह था कि पैर रखने को भी हजारों लोगों को जगह नहीं मिली तो लोग खुले मैदान में बैठ गए। प्रशासन ने कई एलईडी लगाई थी लेकिन वे भी कम पड़ गई। इससे पहले भातखंडे संगीत महाविद्यालय पौड़ी के छात्रों के दल के सदस्यों अनिल बिष्ट, नागेंद्र बिष्ट, प्रमेंद्र नौटियाल, हिमानी भट्ट, संध्या नेगी आदि ने टीम इंचार्ज रामसेवक कैलखुरी के निर्देशन में भोजपुरी, हरियाणवी और राजस्थानी नृत्य की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन जाने माने उद्घोषक हेमंत बिष्ट ने किया।
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कार्यक्रम में अपर मेलाधिकारी निधि यादव, सीओ सिटी चंद्रमोहन सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। पंडाल में पहुंचने पर संस्कृतिक विभाग की ओर से बलराज नेगी, जया बिष्ट आदि ने बुके भेंटकर हंसराज हंस और उनके साथियों का स्वागत किया।  

सफलता के लिए समर्पण जरुरी:हंस
सूफी गायकी में अपना अलग ही मुकाम पाने वाले हंसराज हंस का मानना है कि सफलता पाने के लिए लक्ष्य के प्रति समर्पण बेहद जरुरी है। पंतद्वीप स्थित सांस्कृतिक पंडाल के सभागार में पत्रकारों से वार्ता करते हुए मशहूर हिंदी फिल्मों कच्चे धागे, मौसम,बादशाह, बिच्छू तथा जोड़ी नंबर वन में अपने सूफी और सायराना अंदाज से धूम मचा चुके हंस ने कहा कि कलाकार की सफलता के पीछे उसकी प्रतिभा लगन, मेहनत के साथ-साथ प्रेरणा आदि कई फैक्टर काम करते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पाकिस्तानी गायक नूसरत फते अली खान की गायकी की तारीफ करते हुए कहा कि उनके साथ काम करते समय उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला। जालंधर पंजाब के गांव साफीपुर में जन्में 30 नवंबर 1953 में जन्में हंसराज हंस ने स्कूली मंचों से ही गायकी का जादू बिखेरना शुरु कर दिया था।
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