अल्मोड़ा। एक तरफ इन दिनों रानीखेत में कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच राजनीतिक कटुता चरम पर है वहीं दूसरी ओर राजनीति का गढ़ कही जाने वाली सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच आपसी सौहार्द अनुकरणीय हो सकता है। यहां दोनों प्रमुख दलों में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता सिर्फ वैचारिक मतभेदों तक सीमित रहती है और दोनों दलों के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन में भी खेल भावना बनाए रखते हैं। दिलचस्प यह है कि दोनों दलों के लोग कई बरसों से एक दूसरे के नेताओं का पुतला जलाने के लिए एक साझा स्टैंड का इस्तेमाल कर रहे हैं और बारी-बारी से इसी स्टैंड में पुतला तैयार करके जलाते हैं। इसके लिए कई बार वह एक-दूसरे के कार्यक्रम का इंतजार भी कर लेते हैं।
अल्मोड़ा में भी कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ता आए दिन एक दूसरे दलों और उनके नेताओं के पुतले जलाते हैं और विरोध में जमकर बयानबाजी भी होती है। एक-दूसरे के खिलाफ जुलूस प्रदर्शन भी हुआ करते हैं, लेकिन आम तौर पर दोनों दलों और उनके नेताओं के बीच यहां कभी वैमनस्य और कटुता नहीं दिखाई पड़ती।
भले ही राजनीतिक तरीके से कार्यकर्ता और नेतागण एक दूसरे को पटकनी देने में नहीं चूकते, लेकिन विरोध प्रदर्शन में दोनों दलों के लोग एक तरह की खेल भावना प्रदर्शित करते हैं। उल्लेखनीय है कि नेताओं के पुतला फूंकने में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए 2009 में भाजपा के वर्तमान जिला महामंत्री रवि रौतेला ने अपने वर्कशॉप में लोहे का एक स्थायी स्टैंड तैयार करवाया। इस स्टैंड में कपड़े और कागज आदि लगाने के बाद तुरंत पुतला तैयार हो जाता है। श्री रौतेला बताते हैं कि अब तक वह इस स्टैंड को तीन बार रिपेयर भी करवा चुके हैं।
शुरू में इस स्टैंड में सिर्फ भाजपा वाले ही पुतला जलाते थे, लेकिन पिछले कई सालों से अब भाजपा के साथ ही कांग्रेस के कार्यकर्ता भी इसी स्टैंड में ही एक दूसरे के नेताओं का पुतला तैयार करके जला रहे हैं। भाजपा जिला महामंत्री रवि रौतेला ने बताया कि कुछ साल पहले कांग्रेस के एक स्थानीय नेता ने उनसे पुतला जलाने के लिए स्टैंड उपलब्ध कराने का अनुरोध किया तो उन्होंने मना नहीं किया। रवि रौतेला ने बताया कि यह पुतला स्टैंड वह गांधी पार्क के निकट रहने वाले व्यापार मंडल अध्यक्ष भैरव गोस्वामी के घर पर रखा रखा रहता है और जिसे जरूरत होती है वह वहां से ले जाता है और बाद में वहीं रख देता है।
इस स्टैंड का इस्तेमाल करने के लिए आम तौर पर भाजपा और कांग्रेस के लोग पुतला जलाने का समय भी अलग-अलग निर्धारित करते हैं। पुतला जलाने और विरोध प्रदर्शन के दौरान रास्ते में मुलाकात होने पर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं की हाय-हेलो भी चलती रहती है तथा सामने से मुस्कराते हुए निकल जाते हैं। हालांकि इस स्टैंड में ज्यादातर पुतले भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के ही फूंके जाते हैं लेकिन जरूरत होने पर अन्य दलों और संगठन के लोग भी इस स्टैंड का उपयोग कर लेते हैं।
अल्मोड़ा। आज पुतला जलाना राजनीतिक विरोध प्रदर्शन का सबसे आसान तरीका बन गया है। जहां जुलूस और धरना प्रदर्शन के लिए दर्जनों लोग जुटाने पड़ते हैं वहीं दूसरी ओर आधा दर्जन लोग भी मीडिया को बुलाकर पुतला फूंकने का कार्यक्रम आयोजित कर लेते हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ सालों से राष्ट्रीय दलों के साथ ही अन्य राजनीतिक दलों और संगठनों ने पुतला फूंककर विरोध प्रदर्शन करने का आसान तरीका अपना लिया है।
अल्मोड़ा। अब हर छोटी सी बात पर पुतले जलाए जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक पिछले एक साल में अकेले अल्मोड़ा के गांधी पार्क में 400 से अधिक पुतले जलाए गए हैं। हालांकि यह सुखद पहलू है कि अल्मोड़ा में पुतला जलाने के बाद कार्यकर्ता सड़क से राख आदि हटा लेते हैं।