सरकारी योजनाएं किस प्रकार सफेद हाथी का रूप धारण कर लेती हैं, शिवद्वार पेयजल समूह योजना इसका एक श्रेष्ठ नमूना है। पांच गांवों को पांच माह के भीतर पांच दिन पानी की आपूर्ति हुई है। ग्रामीणों ने शीघ्र पेयजलापूर्ति सुविधा बहाल कराए जाने की मांग की है। समस्या का समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
घोरावल क्षेत्र में विकास पुरुष के नाम से जाने जाने वाले पूर्व सिंचाई मंत्री स्व. लोकपति त्रिपाठी के प्रयासों से चार दशक पूर्व शिवद्वार पेयजल समूह योजना का शुभारंभ हुआ था। शुरुआत में यह योजना 44 गांवों के लिए थी। वर्तमान समय में सिर्फ पांच गांवों सतद्वारी, हिरनखुरी, भैसी, कुण्डा व शिवद्वार को जलापूर्ति हो रही है।
आलम यह है कि कई माह तक एक बूंद पानी लोगों को नसीब नहीं हुआ। हिरनखुड़ी गांव के शिव प्रसाद यादव, सियाराम यादव, सुरेंद्र पटेल, शिवद्वार के राजकुमार गुप्ता, दद्दी प्रसाद, सतद्वारी के मनोज, बृजेश का कहना है कि विगत पांच माह में सिर्फ पांच दिन ही पानी की सप्लाई हुई है।
जैसे-जैसे गर्मी आती जा रही है वैसे-वैसे पानी का संकट गहराता जा रहा है। तालाब, कुआं सूख गए हैं और हैंडपंपों ने भी पानी देना बंद कर दिया है। इसकी वजह से दो किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। ऐसे में अब सिर्फ शिवद्वार पेयजल योजना ही एक उम्मीद बची है। कहा कि अगर शीघ्र पेयजलापूर्ति सुविधा बहाल नहीं की जाती है तो आंदोलन किया जाएगा। ग्रामीणों ने तत्काल गांव में टैंकर से पानी की आपूर्ति करवाए जाने की मांग की है।