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सहारनपुर: सांप्रदायिक हिंसा के बाद शहर में भारी तनाव

ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद Updated Sun, 27 Jul 2014 08:35 AM IST
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सहारनपुर में सांप्रदायिक हिंसा के बाद भारी तनाव है। अफवाहों को भी पंख लग गए और डरे सहमे लोग घरों के अंदर कैद हो गए। तनाव को देखते हुए मिश्रित आबादी वाले संवेदनशील इलाकों में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई।
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गुरुद्वारा रोड से शनिवार की सुबह उठी हिंसा की चिंगारी ने देखते ही देखते आग का रूप लेकर पूरे शहर को चपेट में ले लिया। सड़कों पर घंटों उपद्रवियों का राज रहा। बाजारों में अफरातफरी मची रही। जो लोग ड्यूटी पर जाने के लिए घरों से निकले, वे वापस लौट आए और देखते ही देखते सड़कों पर सन्नाटा पसर गया और महानगर में भारी तनाव व्याप्त हो गया। अधिक मिश्रित आबादी पुराने शहर में होने के कारण वहां सबसे ज्यादा तनाव की स्थिति बनी। महिलाएं और बच्चे घरों में कैद हो गए।

डरे-सहमे लोग फोन कर शहर में दूसरे क्षेत्रों में रह रहे रिश्तेदारों और परिचितों के क्षेत्र की स्थिति के बारे में जानकारी लेते रहे। हर कोई एक-दूसरे को घर से बाहर नहीं निकलने की हिदायत भी देता रहा। हिंसा के बाद अफवाहों का बाजार गर्म हो गया। कभी अफवाह उठती कि फलां स्थान पर एक व्यक्ति को गोली मार दी तो कभी किसी बाजार में दुकान में आगजनी और लूटपाट की अफवाह फैलती। भारी तनाव और अफवाहों को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई। पुलिस और प्रशासन के आला अफसर शहर में लगातार गश्त कर स्थिति पर नजर रखे रहे।
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सहारनपुर में दो संप्रदायों में हिंसक संघर्ष

जमीन के एक पुराने विवाद ने सांप्रदायिक शहर को सांप्रदायिक आग में झोंक दिया। कुतुबशेर थाना क्षेत्र के अंबाला रोड पर शनिवार तड़के दो संप्रदायों में हिंसक संघर्ष के बाद शहर के कई इलाकों में दंगा भड़क गया। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई और 21 लोग घायल हो गए।

घायलों में एक सिपाही और होमगार्ड समेत 11 लोगों को गोलियां लगी हैं। बेखौफ दंगाइयों ने शहर में 100 से अधिक स्थानों पर आगजनी की और बड़ी संख्या में दुकानों और वाहनों को फूंक दिया।

दंगाइयों ने पुलिस की गाड़ियों में भी आग लगा दी। हालात को काबू करने लिए जिला प्रशासन ने शहरी क्षेत्र के छह थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू कर दिया है। इसके साथ ही अर्द्धसैनिक बल के जवानों को तैनात कर दिया गया है। शाम तक हालात को नियंत्रित कर लिया गया लेकिन अफवाहों के कारण माहौल तनावपूर्ण बना रहा।

जमीन को लेकर दो संप्रदायों में विवाद

गुरुद्वारा रोड पर गुरुद्वारे के पास की एक जमीन को लेकर काफी दिनों से दो संप्रदायों में विवाद था। शनिवार तड़के करीब चार बजे एक समुदाय के लोग वहां पहुंचे और हंगामा करने लगे। देखते ही देखते दोनों पक्षों में पथराव शुरू हो गया। चंद कदम दूर कुतुबशेर थाने को भी दंगाइयों ने घेर लिया। पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन पूरी तैयारी से आए दंगाई पुलिस पर भी भारी पड़ने लगे।

पुलिस ने बेरिकेड लगाकर दोनों समुदाय के लोगों को अलग किया लेकिन अंबाला रोड की तरफ से पुलिस पर पथराव और फायरिंग होने लगी। करीब चार घंटे से अधिक समय तक पुलिस और दंगाइयों के बीच हिंसक झड़प होती रही। इस बीच मौका पाकर दंगाइयों ने दुकानों और वाहनों में आगजनी शुरू कर दी। पुलिस और अधिकारी दंगाइयों के आगे बेबस दिखे। अंबाला रोड पर दंगाइयों ने खूब बवाल किया। दंगे की सूचना फैलते ही शहर के कई इलाकों में दोनों समुदाय आमने-सामने आ गए।

इसी दौरान अरबी मदरसे के पास व्यापारी हरीश कोचर को गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके अलावा चिलकाना रोड फैय्याज नर्सिंग होम के पास 18 वर्षीय युवक का शव मिला। देर शाम तक उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी थी। बवाल में एक घायल आरिफ (18) की मेरठ मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई। गोली लगने से घायल 11 लोगों को मेरठ और देहरादून रेफर किया गया है। हालात पर काबू के लिए एयरफोर्स के जवानों सहित रेपिड एक्शन फोर्स और अर्द्धसैनिक बलों को तैनात कर दिया गया। कमिश्नर, डीआईजी, डीएम, एसएसपी सहित अधिकारियों ने शहर में मार्च किया।

हालात पर काबू पाने शासन ने भेजे अफसर

शहर के हालात बिगड़ते देख राज्य सरकार ने लखनऊ से आईएएस भुवनेश कुमार और आईपीएस दीपक रतन को विशेष विमान से सहारनपुर भेजा। शाम करीब पांच बजे तक प्रशासन ने हालात को नियंत्रित कर लिया। आईएएस भुवनेश कुमार ने बताया कि शहर में अर्द्धसैनिक बल के जवानों को तैनात किया गया है। रात में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त संख्या में जवानों को तैनात कर दिया गया है।

अमृतसर में आज होने वाले विश्व पंथक कांफ्रेंस पर लगी रोक
सहारनपुर की हिंसक घटना को सिख पंथ के लिए एक और संकट करार देते हुए अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने एचएसजीएमसी विवाद अपने हाथ में ले लिया है। शनिवार को इस मसले पर रविवार को श्री दरबार साहिब अमृतसर में शिअद व एसजीपीसी की तरफ से होने वाली विश्व पंथक कांफ्रेंस और 28 जुलाई को एचएसजीएमसी (एडहॉक) द्वारा करनाल में आयोजित किए जाने वाले सिख सम्मेलन को रद्द करने संबंधी हुक्मनामा ज्ञानी गुरबचन सिंह ने जारी किया।

थाने के सामने सिपाही को गोली मारी

कुतुब शेर थाने के सामने हो रहे बवाल में उपद्रवियों ने थाने के सामने खड़े सिपाही को निशाना बनाया। गोली सिपाही की पीठ में लगी और खून से लथपथ हो गया। बेबसी इस कदर थी कि घायल सिपाही को स्ट्रेचर और अस्पताल तक पहुंचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। गोली लगे सिपाही को पैदल ही करीब 500 मीटर तक ले जाया गया और फिर उसे गाड़ी में बैठाकर अस्पताल पहुंचाया गया। वहां से उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।

चार घंटे में भी 400 मीटर पीछे नहीं कर पाए      
दो समुदायों में शुरू हुए विवाद के बाद पुलिस फोर्स जब पहुंची तो बेरिकेडिंग लगाकर दोनों को रोक दिया, मगर उपद्रवियों ने जब पुलिस पर हमला शुरू किया तो जवान भागने लगे। आलम यह रहा कि अंबाला हाईवे पर कब्जा जमाए दंगाइयों को 400 मीटर पीछे करने में चार घंटे से ज्यादा का समय लग गया। इसके बाद भी पुलिस पर पथराव और फायरिंग होती रही।

कर्फ्यू का पुलिस को घंटों पता नहीं लगा

सांप्रदायिक हिंसा होने के बाद जिलाधिकारी संध्या तिवारी ने सुबह करीब 10 बजे शहर में कर्फ्यू लगाने की घोषणा की, लेकिन पुलिस को कई घंटे तक इसका पता तक नहीं लगा। इस दौरान उपद्रवी सड़कों पर आगजनी और तोड़फोड़ करते रहे। गुरुद्वारा रोड पर दो समुदायों के लोगों में पथराव और फायरिंग के बाद पुलिस ने उपद्रवियों को वहां से खदेड़ा तो तो अंबाला रोड पर दुकानों में तोड़फोड़ और आगजनी शुरू हो गई।
    
हालात बिगड़ते देख जिलाधिकारी संध्या तिवारी ने करीब 10 बजे शहरी क्षेत्र में कर्फ्यू लगाने की घोषणा कर दी, लेकिन पुलिस को घंटों बाद तक इसका पता नहीं चला। गुरुद्वारा रोड पर मौजूद एक दरोगा को जब बताया गया कि शहर में कर्फ्यू की घोषणा हो चुकी है तो उसने कहा कि अभी तक वायरलेस पर ऐसा कोई संदेश ही नहीं मिला है।

कर्फ्यू की घोषणा के बाद उपद्रवी सड़कों पर तोड़फोड़ और आगजनी करते रहे। सड़कों पर खड़ी ठेलियों को आग लगाई गई।  जिसे जहां मौका मिला, वहां दुकानों को भी आग के हवाले कर दिया। डीआईजी एन रविंदन और मंडलायुक्त तनवीर जफर अली पुलिस के साथ घंटाघर पहुंचे और उन्होंने भी कर्फ्यू लगाए जाने की बात कही, लेकिन तभी कुछ ही दूरी पर एसएएम इंटर कॉलेज के पास दो समुदायों के युवकों के बीच पथराव हो गया। पुलिस को तब तक यह जानकारी नहीं हो सकी थी कि कर्फ्यू लग चुका है या नहीं।

पल्सर सवार नकाबपोश युवकों ने मचाया आतंक

सहारनपुर के सांप्रदायिक दंगे में पल्सर सवार नकाबपोश दो युवकों ने पुराने शहर में खूब आतंक मचाया। सड़क पर उतरे इन दोनों युवकों ने लोगों के नाम पूछ-पूछकर गोली मारी। इसमें आढ़ती हरीश कोचर की जान चली गई।  कुछ अन्य गंभीर घायलों को जिला अस्पताल से हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। क्षेत्र के लोग दोनों युवकों के आतंक की सूचना पुलिस को देते रहे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। शाम तक पुराने शहर में इन दोनों का पूरा खौफ रहा।

सबसे पहले इन युवकों का शिकार बने जैन बाग निवासी नीरज जैन। दोपहर को वह अपने घर के बाहर खड़े थे। तभी पल्सर पर सवार नकाब पहने दो युवक उनके पास आए और नाम पूछा। जैसे ही उन्होंने नाम बताया बाइक पर पीछे बैठे युवक ने तमंचा निकाला और नीरज पर फायर कर दिया। गनीमत ररही कि गोली दाएं हाथ में लगी। परिजन तुरंत उन्हें जिला अस्पताल ले गए। इसके बाद अरबी मदरसे के पास सब्जी मंडी से लौट रहे आढ़ती हरीश कोचर से पल्सर सवार दो युवकों ने नाम पूछा और सिर में गोली मार दी। हरीश की मौके पर ही मौत हो गई। यहां पल्सर का रंग नीला बताया गया।

मोहल्ला कायस्थान के अभिनव जैन को डेयरी पर दूध लेते वक्त और इंद्रा चौक के नदीम को भी रांघड़ो के पुल पर पल्सर सवार दो युवकों ने नाम पूछ कर गोली मार दी। जैन बाग क्षेत्रवासियों का कहना है कि सुबह से ही पुलिस को पल्सर सवार युवकों की जानकारी दे दी गई थी, लेकिन कोई अलर्ट नहीं दिखा। पुलिस की गश्त तक नहीं हुई। शाम तक शहर में पल्सर सवार युवकों के घूमने और आतंक फैलाने की सूचनाएं आती रही।

सुरक्षा के लिए नगर को छह भागों में बांटा

सुरक्षा की दृष्टि से शहर को छह भागों में बांटकर 12-12 घंटे के लिए मजिस्ट्रेट और सीओ की ड्यूटी लगाई गई है। जिलाधिकारी संध्या तिवारी ने बताया कि कुछ असामाजिक तत्वों की अवांछनीय गतिविधियों के कारण शहर की स्थिति तनावपूर्ण बनी। सांप्रदायिक संघर्ष रोकने के लिए नगर कोतवाली, देहात कोतवाली, कुतुबशेर, जनकपुरी, थाना मंडी और थाना सदर बाजार थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाया गया। स्थिति से निपटने के लिए नगर क्षेत्र को छह भागों में बांटकर 12-12 घंटे के लिए मजिस्ट्रेट और सीओ की डयूटी लगाई गई है। सभी क्षेत्रों में पर्याप्त पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया है। सभी मजिस्ट्रेट और क्षेत्राधिकारी लगातार गश्त कर स्थिति पर नजर रख रहे हैं।

नियंत्रण कक्ष खुला
कलक्ट्रेट में नियंत्रण कक्ष खोल दिया गया है। उसका टेलीफोन नंबर 01322713232 है। जिलाधिकारी ने बताया कि डूडा के परियोजना निदेशक और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को नियंत्रण कक्ष का प्रभारी अधिकारी बनाया गया है। वे 12-12 घंटे नियंत्रण कक्ष में उपलब्ध रहेंगे और प्रत्येक सूचना का संज्ञान लेकर तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराएंगे। वे उनकी और पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में हर छोटी-बड़ी घटना को लाते रहेंगे। दोनों अधिकारियों के सहयोग के लिए स्टाफ भी लगाया गया है। पुलिस ने नियंत्रण कक्ष के लिए आपरेटर और वायरलैस सेट की भी व्यवस्था की है।

धर्मस्थलों की निगरानी बढ़ी

सांप्रदायिक हिंसा के बाद प्रशासन ने सभी  धर्मस्थलों की निगरानी बढ़ा दी है। धर्मस्थलों पर लोग एकत्र न हों और लाउडस्पीकर आदि से किसी तरह की अफवाह न फैलाई जा सके। इसके लिए सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी लगाए गए हैं। डीएम संध्या तिवारी ने बताया कि इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि किसी भी धर्मस्थल पर समूहों में लोग जमा न हो और ध्वनि विस्तारक यंत्रों से अफवाहें न फैलाई जाएं। सादे कपड़ों में लगाए गए पुलिसकर्मी धर्मस्थलों के आसपास रहकर ऐसी प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं और यदि कोई गुप्त मंत्रणा होती है तो उसकी सूचना तत्काल एसएसपी को देंगे। सेक्टर मजिस्ट्रेट और सीओ भी अपने क्षेत्रों के धर्मस्थलों पर निगाह रखेंगे।
       
अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई
अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसे तत्वों को चिह्नित किया जाएगा। उन्होंने जनता से भी अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। डीएम ने अधिकारियों को भी निर्देशित किया गया है कि वे लाउडस्पीकर के जरिए जनता को अफवाहों के प्रति सचेत करते रहे।
        
तलाशी के निर्देश
जिलाधिकारी ने हथियारों विस्फोटकों एवं ज्वलनशील पदार्थों की दुकानों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए है। सभी थाना प्रभारियों से कहा गया है कि वे अपने क्षेत्रों में पड़ने वाली ऐसी सभी दुकानों की सघन तलाशी लेने के बाद उन्हें सील कर दे ताकि कोई अवांछनीय तत्व इनका दुरुपयोग न कर सके।

सैंकड़ों यात्री बीच में फंसे

शहर में शनिवार को भड़की सांप्रदायिक हिंसा में रोडवेज और निजी बस अड्डों से आने वाले और वहां जाने वाले सैकड़ों यात्री बीच रास्तों में जगह-जगह फंस गए। सबसे बुरा हाल अंबाला रोड बस अड्डे का रहा। यहां उपद्रवियों ने वाहनों और दुकानों में जमकर आगजनी की। इसके बाद रोडवेज ने अंबाला रोड और स्टेशन के पास के बस अड्डे से बसों को हटवाकर उन्हें कार्यशाला भेज दिया गया।

उधर, निजी बसों का भी संचालन बंद होने के कारण यात्रियों के पास समय से रास्ते से  निकलने का मौका ही नहीं मिला। इसके चलते जिसे जहां जगह मिली, सुरक्षित ठिकाने में छिपकर समय बिताया।

शहर से रोजाना 350 से अधिक रोडवेज और निजी बसें बाहरी रूटों पर निकलती हैं। हिंसा के बाद इन बसों के पहिए थमने से यात्रियों के पास अन्य विकल्प नहीं बचा। कुछ यात्रियों ने तो फोन पर परिजनों, परिचितों और रिश्तेदारों को बुलाकर किसी तरह सुरक्षित स्थानों पर शरण ली। काफी संख्या में यात्री अधर में फंसे रह गए। न तो वे घर जा पाए और न ही सुरक्षित ठिकानों पर। इसीलिए किसी ने रेलवे स्टेशन, किसी ने ढाबे तो किसी ने अन्य स्थान पर जाकर माहौल सुधरने का इंतजार किया।

हिंसा को देखते हुए स्पेशल टीम गठित

सहारनपुर में हुई हिंसा में घायलों को उचित इलाज मिल सके इसके लिए मेरठ के मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की भी छुट्टी पर रोक लगा दी गई है। इतना ही नहीं सीनियर डॉक्टरों की एक टीम भी गठित की गई है।

इसमें मेडिसन, सर्जरी, हड्डी और एनेस्थीसिया के सीनियर डॉक्टरों को रखा गया है। इमरजेंसी में भी दो टीम अलग से लगाई गई हैं। एक टीम में सीनियर डॉक्टर और दूसरी में जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों को रखा गया है।

सहारनपुर में घायल हुए कुछ लोगों को मेडिकल कॉलेज लाया गया था। देर शाम तक आठ घायलों को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था, इनमें एक की मौत हो गई। उधर, प्रशासन की तरफ से मेडिकल कॉलेज को सूचना दी गई है कि कुछ और घायलों को लाया जा सकता है। इसके चलते मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने छुट्टियों पर रोक लगाते हुए डॉक्टर की टीम भी गठित कर दी है।
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