बरेली। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद प्रदेश सरकार चीनी मिलों से किसानों को गन्ने का मात्र 30 फीसदी ही भुगतान करा सकी है। अगले दो महीनों तक भी कोर्ट के आदेश के अनुसार किसानों को गन्ने का भुगतान होने की संभावना नजर नहीं आ रही है। जबकि हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को आदेश दिए थे कि वह गन्ना उत्पादक किसानों का 15 जुलाई तक 70 फीसदी भुगतान कराएं। शासन और प्रशासनिक अधिकारियों ने चीनी मिलों पर कोर्ट के आदेश का पालन कराने के उद्देश्य से सख्ती की लेकिन मिलों ने कंगाली का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए।
अपर आयुक्त (गन्ना ) दिनेश्वर मिश्रा का कहना है कि उनके सर्किल में दो महीने पहले तक बरेली और अलीगढ़ मंडल की 18 चीनी मिलों से जुडे़ 10 लाख से अधिक किसानों का 500 करोड़ रुपयों का भुगतान लंबित था। इसमें से करीब 150 करोड़ का ही भुगतान हुआ है। बाकी के भुगतान के लिए चीनी मिलों ने कंगाली का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए हैं।
पिछले महीने केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों के भुगतान के लिए 6600 करोड़ रुपये का कर्जा बिना ब्याज के देने की घोषणा की है। यदि यह रकम मिल जाती है तो बरेली और अलीगढ़ मंडल के 18 चीनी मिलों को किसानों के बकाए का भुगतान करने के लिए 100 करोड़ रुपये और मिल जाएंगे। उन्होंने बताया कि अपर आयुक्त (गन्ना ) बरेली के सर्किल में से बरेली जिले की पांच चीनी मिले हैं। इनके अलावा शाहजहांपुर में पांच, बदायूं में दो, पीलीभीत में चार, कासगंज और अलीगढ़ की एक-एक चीनी मिल हैं। इन सभी पर अब 350 करोड़ रुपया किसानों की देनदारी है।
वर्जन
चीनी मिलों की आरसी काटने और मुकदमे की धमकी देने से कुछ नहीं होगा। शुगर लॉबी सरकार पर हावी हो चुकी है। हम हाईकोर्ट में प्रदेश सरकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएंगे। 27 जुलाई को भाकियू लखनऊ में मुख्यमंत्री का घेराव करेगी। - चौधरी हरवीर सिंह, राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य भाकियू