अयोध्या में मंदिर-मस्जिद का विवाद गरमाकर वोट बैंक की राजनीति और माहौल बिगाड़ने वाले तत्वों को हाशिम अंसारी हमेशा खरी-खरी सुनाते थे। इस विवाद के लिए वे भाजपा से अधिक कांग्रेस को गुनहगार मानते थे। वे महंत ज्ञानदास को हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए समर्पित मानते थे। उनके अलावा कभी किसी पर विश्वास नहीं करते थे। देखें-
छह दिसंबर को मोहन भागवत के नाम पर मातम मनाएंगे। दम हो तो मोहन भागवत अयोध्या आकर मंदिर बनाकर दिखाएं। (2 दिसंबर 2015)
गोमांस को लेकर राजनीति की जा रही है। इस विषय पर पार्लियामेंट का सत्र बुलाया जाए और मुल्क में गोवध और गोमांस की बिक्री पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाया जाए। (20 अक्तूबर 2015)
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सहायक महासचिव अब्दुल रहीम कुरैशी की किताब फैक्ट्स ऑफ अयोध्या एपीसोड पर केंद्र सरकार को तत्काल प्रतिबंध लगा देना चाहिए। कुरैशी अयोध्या और राम को नहीं जानते। इस तरह की बातें किताबों में लिखकर देश में सांप्रदायिक वैमनस्यता फैलाई जा रही है। (4 नंवबर 2015) (फाइल फोटो)
कांग्रेस के तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंहा राव ने बाबरी मस्जिद तुड़वाई। राव चाहते तो बाबरी मस्जिद को ढहाए जाने से रोक सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। वे असली कुसूरवार थे, फिर भी उन्हें मुल्जिम नहीं बनाया गया। राव ने मस्जिद दोबारा बनवाने का वादा किया था, फिर क्यों नहीं बनी? (18 जनवरी 2016)
बीजेपी और कांग्रेस के लोग नेतागीरी के लिए देश के कानून को पैरों तले कुचल रहे हैं। सभी नेता मंदिर-मस्जिद के नाम पर नेतागीरी करते हैं। क्या हमारे मरने के बाद फैसला होगा? अभी तक मस्जिद तोड़ने वालों को क्या कोई सजा मिली? (18 जनवरी 2016)