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Nautapa 2026: नौतपा में क्यों नहीं खाना चाहिए बैंगन? एक गलती आपको बना सकती है किडनी स्टोन का मरीज

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Tue, 26 May 2026 08:03 PM IST

सार

नौतपा में खानपान और दिनचर्या को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। अक्सर चर्चा रहती है कि नौतपा में बैंगन नहीं खाना चाहिए। पर क्यों, बैंगन खाने से क्या दिक्कतें हो सकती हैं? आइए इस बारे में जानते हैं।
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नौतपा में बैंगन खाने से क्या होता है? - फोटो : Amarujala.com/AI

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देश के ज्यादातर हिस्से इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं। पारा पहले से ही 45 डिग्री से ऊपर बना हुआ है, इसपर नौतपा भी शुरू हो चुका है। 25 मई से 2 जून तक रहने वाला नौतपा साल के सबसे भीषण गर्मी वाला नौ दिन होता है। इन दिनों में ग्रहों की स्थिति ऐसी होती कि  सूरज की किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं। इससे तापमान बढ़ने लगता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इन भीषण गर्मी के दिनों में सेहत को गंभीर खतरा रहता है। नौतपा के दौरान तापमान में वृद्धि के कारण लू और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा और भी बढ़ जाता है। नौतपा में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार चला जाता है। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि 45 डिग्री से अधिक का तापमान किस तरह से शरीर के तमाम अंगों के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नौतपा के दौरान धूप और गर्मी से बचने के साथ खान-पान को लेकर भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अक्सर लोग सलाह देते हैं कि नौतपा के दिनों में बैंगन नहीं खाना चाहिए? आखिर इसके क्या कारण हैं और बैंगन खाने से क्या दिक्कतें हो सकती हैं? आइए जान लेते हैं।
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नौतपा में बैंगन खाने से क्या होता है? - फोटो : Freepik.com
नौतपा में न खाएं गर्म तासीर वाली चीजें

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गर्मी विशेषकर नौतपा के दिनों में ऐसी चीजें ज्यादा खानी चाहिए जिनमें पानी की मात्रा हो, शरीर को जरूरी पोषक तत्व और इलेक्ट्रोलाइट्स मिलें साथ ही तासीर ठंडी हो। आयुर्वेद के अनुसार बैंगन की तासीर गर्म होती है। इसमें ऐसे तत्व होते हैं जो एलर्जी, एसिडिटी और पेट संबंधी दिक्कतें बढ़ा सकते हैं।

मेडिकल साइंस भी कहता है कि इन दिनों में बैंगन खाने से कुछ लोगों में दिक्कतें बढ़ सकती हैं। बैंगन में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो एलर्जी, सूजन से लेकर किडनी में स्टोन तक के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
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किडनी स्टोन की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
क्यों नहीं खाना चाहिए बैंगन?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इन दिनों में बैंगन खाने से कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।
 
  • आयुर्वेद बैंगन को 'गर्म' प्रकृति वाली सब्जी बताया गया है। भीषण गर्मी के दौरान इसे खाने से आपकी पाचन क्रिया बिगड़ सकती है, जिससे हार्ट बर्न और एसिड रिफ्लक्स की समस्या हो सकती है।
  • बैंगन में प्राकृतिक रूप से ऑक्सालेट पाया जाता है। गर्मियों में, जब पहले से शरीर में पानी की कमी होती है और किडनी पर ज्यादा दबाव रहता है  ऐसे में ज्यादा ऑक्सालेट वाली चीजें खाने से किडनी में  पथरी होने का खतरा बढ़ जाता है। 
  • बैंगन चूंकि गर्म तासीर वाली सब्जी है, ऐसे में इससे अंदरूनी गर्मी पैदा होती है और एलर्जी वाली प्रतिक्रियाएं जैसे त्वचा लाल होने, खुजली या चकत्ते पड़ने की समस्या बढ़ जाती है।

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बैंगन खाने से क्या होता है? - फोटो : Freepik.com
किन लोगों को ज्यादा सावधानी रखनी चाहिए?

कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में बैंगन आपकी परेशानी बढ़ा सकता है।
 
  • जिन लोगों को पहले से एलर्जी की समस्या होती है, उनमें बैंगन खाने के बाद खुजली, रैशेज या सूजन हो सकती है। 
  • आयुर्वेद में माना जाता है कि बवासीर और त्वचा रोग वाले मरीजों में गर्म तासीर वाली चीजें तकलीफ बढ़ा सकती हैं।
  • किडनी स्टोन के मरीजों को भी सीमित मात्रा में बैंगन खाने की सलाह दी जाती है क्योंकि इसमें ऑक्सलेट मौजूद होते हैं। 
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नौतपा में अपना ध्यान कैसे रखें? - फोटो : Amarujala.com/AI
नौतपा में और कौन-कौन सी सावधानियां जरूरी हैं?

नौतपा में सेहत को लेकर सावधानी बहुत जरूरी है। गर्मी-लू के प्रकोप से बचने के लिए शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी है। इसके लिए दिनभर में पर्याप्त पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर चीजें  जैसे नींबू पानी, छाछ और नारियल पानी पानी चाहिए।
 
  • दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच तेज धूप में निकलने से बचना चाहिए। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो सिर को ढककर रखें।
  • ज्यादा तला-भुना, मसालेदार और बहुत गर्म भोजन शरीर की गर्मी बढ़ा सकता है। ऐसी चीजें खाने से बचें।
  • कैफीन और शराब जैसी चीजें शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती हैं, इसलिए इनसे भी बचना बेहतर माना जाता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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