श्रीनगर के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) में स्थानीय और बाहर के छात्रों के बीच हुए विवाद के चलते इस समय कैंपस में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है। वहां पर पैरामिलिट्री की 5 कंपनियां मौजूद हैं, जिनमें कुल मिलाकर जवानों की संख्या 600 है।
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- फोटो : Amar Ujala
आपको बता दें कि एनआईटी में करीब 2800 स्टूडेंट हैं, जिनमें से करीब 750 जम्मू-कश्मीर के हैं, जबकि अन्य बाहरी राज्य के स्टूडेंट हैं। ऐसे में श्रीनगर का एनआईटी कैंपस भारत का सबसे अधिक सुरक्षा बलों की तैनाती वाला कैंपस बन गया है। कैंपस में स्थानीय पुलिस मौजूद नहीं है, क्योंकि उन पर बाहरी छात्रों के साथ भेदभाव करने का आरोप है।
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31 मार्च की रात भारत-वेस्ट इंडीज मैच में भारत की हार के बाद कथित तौर पर स्थानीय लोगों ने एनआईटी श्रीनगर के सामने पटाखे फोड़े, जबकि इंस्टीट्यूट में मौजूद गैर-कश्मीरी छात्रों के हॉस्टल पर कश्मीरी छात्रों द्वारा जश्न मनाने के दौरान पत्थर फेंके गए। गैर कश्मीरी छात्रों ने इसका विरोध किया तो कुछ छात्रों ने पथराव शुरू कर दिया था। इसके बाद कैंपस में पुलिस तैनात कर दी गई।
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मामला तीन दिन तक शांत रहा आचानक एनआईटी श्रीनगर में मंगलवार यानि 5 अप्रैल को फिर जमकर बवाल हुआ। कुछ गैर स्थानीय छात्र घटना से परेशान होकर राज्य से बाहर माइग्रेशन करवाना चाह रहे थे, जिसके लिए इन छात्रों ने संस्थान में एक शांतिपूर्ण जुलूस निकाला था। इसके बाद पुलिस ने बाहरी छात्रों को दौड़ा-दौड़ाकर बुरी तरह पीटा। पुलिस की पिटाई से सौ से ज्यादा छात्र जख्मी हुए।
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आरोप है कि पुलिस ने हॉस्टल में घुसकर छात्रों को बाहर निकाला और बेरहमी से पीटा। इस दौरान एसपी स्तर के दो अधिकारी भी मौजूद थे। धरने पर बैठे छात्रों में अधिकतर तीसरे सेमेस्टर के छात्र हैं, जिनका यह भी कहना है कि उन्हें यहां अपना भविष्य असुरक्षित लग रहा है। पुलिस की मार से डरे-सहमे और पिटे छात्रों ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर गृहमंत्री, मानव संसाधन मंत्री और प्रधानमंत्री तक से मदद की गुहार लगाई। जिसके बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पूरे मामले में हस्तक्षेप किया। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से बात की और ट्वीट कर छात्रों को सुरक्षा का भरोसा दिया।