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बीच में सेमेस्टर छोड़ा तो कहीं और नहीं मिलेगी नौकरी

Updated Thu, 08 Oct 2015 01:00 PM IST
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डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एपीजेएकेटीयू) से संबद्ध कॉलेज अब सेमेस्टर के बीच में शिक्षकों को नहीं निकाल सकेंगे। इतना ही नहीं किसी शिक्षक को निकालने से पहले उनको पर्याप्त समय का नोटिस भी देना होगा।
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इस संबंध में विश्वविद्यालय ने सर्कुलर जारी कर दिया है। वहीं यदि कोई शिक्षक बीच सेमेस्टर कॉलेज छोड़ने का प्रयास करेगा, तो विश्वविद्यालय से संबद्ध किसी अन्य कॉलेज में उसे नहीं रखा जाएगा। यह सारी व्यवस्था इसलिए की जा रही है जिससे कि सेमेस्टर के बीच में छात्रों की पढ़ाई का नुकसान न हो। साथ ही संस्थान शिक्षकों का शोषण न कर पाएं।

एपीजेएकेटीयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने बताया कि ऐसे बहुत से मामले सामने आते हैं, जिनमें कॉलेज मिड सेमेस्टर में ही शिक्षकों को टर्मिनेट कर देते हैं। कई बार तो शिक्षकों को पर्याप्प्त नोटिस तक नहीं दिया जाता। इससे न केवल शिक्षण कार्य प्रभावित होता है, बल्कि निकाले गए शिक्षक के लिए भी समस्या होती है।
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कोर्स न चलने की पहले से देनी होगी सूचना

कई बार शिक्षण संस्थानों को इंजीनियरिंग की किसी खास ब्रांच या अन्य पाठ्यक्रम में अगले सत्र में कम प्रवेश होने की संभावना होती है। ऐसे में वे उस कोर्स या ब्रांच में प्रवेश न लेने और उसका संचालन बंद करने की तैयारी करते हैं।

ऐसी स्थिति में उस संस्थान को संबंधित ब्रांच या कोर्स में नियुक्त शिक्षकों की इसकी जानकारी उस सत्र के शुरू होने से पहले अप्रैल या मई तक हर हाल में देनी होगी, ताकि वे शिक्षक दूसरी जगह नौकरी तलाश सकें।

यदि किसी संस्थान ने प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के बाद जैसे कि जून या इससे बाद में पहले कोर्स में प्रवेश की स्थिति देखी और फिर उसका संचालन न करने की योजना बनाई तो वे उसके शिक्षकों को नहीं निकाल सकेंगे।

कुलपति ने बताया कि यदि किसी लेक्चरर या असिस्टेंट प्रोफेसर ने अपनी सेवा के दो साल और एसोसिएट प्रोफेसर या प्रोफेसर ने एक साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है तो उनकी सेवाएं समाप्त करने से पहले कॉलेज उनको कम से कम तीन माह का नोटिस देगा। इनके अलावा अन्य किसी शिक्षक को निकालने के लिए भी न्यूनतम एक माह पहले नोटिस दिया जाएगा।
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