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सेना के हथियारों के साथ बच्चों ने बिताया दिन

लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jan 2020 01:51 AM IST
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सेना के हथियारों के साथ बच्चों ने बिताया दिन
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‘ये कौन सा हथियार है सर, इसे कैसे चलाते हैं? जवाब मिला, दुश्मनों की संख्या जब ज्यादा हो या बंकर में दुश्मन ताक में बैठा हो तो उसको नेस्तनाबूद करने केलिए इस 30 एमएम रॉकेट का लांचर इस्तेमाल करते हैं। एक ही बार में, अपनी जगह पर बैठे-बैठे हम उसको खत्म कर देते हैं।’ इस तरह के सवाल-जवाब सेना मेले में जवानों और स्कूली बच्चों के बीच हुए। यह मेला मध्य कमान की ओर से छावनी केरेसकोर्स मैदान के सामने ओपन ग्राउंड पर मंगलवार से शुरू हुआ। ‘अपनी सेना को जानें’ मेले का आयोजन बच्चों और युवाओं को सेना केप्रति जागरूक करने के उद्देश्य से किया गया। मेला बुधवार को भी सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक खुला रहेगा। मेले में एनसीसी निदेशालय तथा भर्ती निदेशालय की ओर से स्टॉल, फूड व चिकित्सा स्टॉल भी लगाए गए।
खुखरी नृत्य ने भरा रोमांच
भारतीय सेना के तीन अंगों केजवान अपने अदम्य साहस और वीरता के लिए जाने जाते हैं। इनमें से थल सेना की गोरखा रेजीमेंट का अपना गौरवशाली इतिहास है और इस रेजीमेंट के जवान दिलेर होने के साथ जोश से भरे होते हैं। इनका खुकरी नृत्य रोमांच भर देता है। मेले में इन्होंने नृत्य कौशल का परिचय देकर माहौल में रोमांच भर दिया। इसके अलवा गतका व अन्य आयोजन भी हुए।
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एके 47 तो आतंकवादी इस्तेमाल करते हैं न!
जैसे-जैसे कतार में लगे बच्चे आगे बढ़ रहे थे, स्टॉल पर लगे हथियार देख उनकी उत्सुकता व जिज्ञासा बढ़ती जा रही थी। 5.5 एमएम इंसास, वसूका ग्रेनेड लॉन्चर, एमपी9, स्नाइपर, 40एमएमजीएल और एके47। एक छात्र ने जवान से कहा, एके 47 तो आतंकी इस्तेमाल करते हैं ना। जवान ने कहा, यह हमारे पास है, हम दुश्मन के खिलाफ इसका इस्तेमाल करते हैं।
हमारे जवान ‘ही मैन’ की तरह
मेले में आई स्टूडेंट कलश ने कहा कि मेरे पापा भी सेना में हैं। सेना की रक्षा देश करती है। एकदम अलग पर्सनालिटी होती है सैनिकों की। एकदम ‘हीमैन’ की तरह। मुझे भी ‘शी विमेन बनना है।’
अनुशासन सिखाती है सेना
सुनिधि कहती हैं कि हथियारों केबारे में बहुत कुछ नहीं जानते, लेकिन यहां आकर कई जानकारियां मिलीं। सेना की सबसे अच्छी बात यह लगती है कि सेना हमें अनुशासन सिखाती है।
हमें देश के लिए कुछ करना है
विश्वजीत कहते हैं कि सेना में एकता का भाव हमें प्रेरित करता है। हमें भी चिंता होती है, जब हम सुनते हैं कि कहीं लड़ाई हो रही है, उस वक्त वहां तैनात सैनिकों को लेकर फिक्र होती है। फिर भी हमें देश के लिए कुछ करना है, अपने पापा से मैंने यही सीखा है।
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