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चुनाव आयोग को ठेंगा, रैलियों पर 450 करोड़ होंगे खर्च!

शोभित श्रीवास्तव/लखनऊ Updated Tue, 12 Nov 2013 11:54 AM IST
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चुनाव में होने वाले बेतहाशा खर्चे पर लगाम लगाने के लिए चुनाव आयोग ने नियम निकाला तो राजनीतिक दलों ने उसकी काट निकाल ली।
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ज्यादातर सियासी दलों में आचार संहिता की नकेल लगने से पहले ज्यादा से ज्यादा रैलियां कर लेने की होड़ मची हुई है। भाजपा, कांग्रेस व सपा रैलियों पर बेहिसाब पैसा खर्च कर रही हैं।

दिसंबर तक प्रदेश भर में ऐसी 50 रैलियां होनी हैं। इन पर 400 से 450 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। रैलियों के मामले में भाजपा सबसे आगे है। प्रदेश में दिसंबर तक नरेंद्र मोदी की आठ रैलियां होनी हैं। 
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ये आगरा, लखनऊ, मेरठ, मुरादाबाद, गोरखपुर व काशी में होंगी। भाजपा की हर रैली पर 8 से 10 करोड़ रुपये तक खर्च का अनुमान लगाया जा रहा है।

हालांकि प्रदेश भाजपा के नेता इन रैलियों पर होने वाले खर्च का ब्यौरा देने को तैयार नहीं हैं। कांग्रेस भी प्रदेश में अब तक राहुल गांधी की चार बड़ी रैलियां आयोजित कर चुकी है। इनमें अलीगढ़, रामपुर, सलेमपुर व राठ (हमीरपुर) शामिल है।
सपा भी पीछे नहीं, बसपा तैयारी मेंसमाजवादी पार्टी भी महंगी रैलियों के मामले में पीछे नहीं है। सपा अब तक आजमगढ़ व मैनपुरी दो स्थानों पर बड़ी रैली कर चुकी है।

मुलायम सिंह यादव व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की इन रैलियों को सफल बनाने के लिए खूब पैसा खर्च किया गया। बरेली में 21 नवंबर को रैली होनी है।

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इसके अलावा दिसंबर तक प्रदेश में कई और बड़ी रैलियां सपा आयोजित करने जा रही है। बहुजन समाज पार्टी भी जल्द ही प्रदेश में कई रैलियां करने की तैयारी में है।
गरीबी की बात, रैलियों के खर्च पर मौनखासबात है कि रैलियों में नेता प्रदेश व देश में गरीबी की बात तो करते हैं, लेकिन रैलियों पर हो रहे करोड़ों रुपये के खर्च पर कुछ भी कहने से बचते हैं। एक-दूसरे को देख सियासी दल रैली में भारी भीड़ जुटाने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं।

सबसे ज्यादा इन पर खर्च
- हेलीपैड, हेलीकॉप्टर, गाड़ियों के पेट्रोल, पांडाल, लाइट, साउंड सिस्टम व एलसीडी स्क्रीन
- सुरक्षा प्रबंध, इवेंट मैनेजमेंट
- पोस्टर-बैनर व विज्ञापन
- खाना-पीना, ठहरना और दवाइंयां
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