नियमों को धता बताकर अवैध निर्माण करने वाले सरोजनी नगर से सपा विधायक शारदा प्रताप शुक्ला फंस गए हैं। एलडीए ने उनके द्वारा किया गया अवैध निर्माण ढहाने के लिए उन्हें 15 दिन का समय दिया है।
उनसे कहा गया है कि या तो वे यह अवैध निर्माण वह स्वयं ढहा दें अन्यथा प्राधिकरण का दस्ता इस कार्रवाई को अंजाम देगा।
इसी बीच विधायक ने शुक्रवार को एक बार फिर से प्राधिकरण के सचिव अष्टभुजा प्रसाद तिवारी से मुलाकात कर उनके समक्ष अपना पक्ष रखा।
30 अक्तूबर को विधायक के कब्जे को अवैध मानते हुए एलडीए प्रशासन ने इसे ढहाने की तैयारी शुरू कर दी थी। एलडीए उपाध्यक्ष एमपी अग्रवाल ने संबंधित अधिशासी अभियंता को आवश्यक कार्रवाई का आदेश दिया था।
कानपुर रोड योजना की जिस जमीन पर विधायक का कब्जा है वह एलडीए की है। इस मसले को लेकर न्यायालय करीब दो महीने पहले कड़ी नाराजगी भी जता चुका है।
कानपुर रोड नगर प्रसार योजना-3 के तहत किला मोहम्मदी गांव के खसरा संख्या 250 व 251 की करीब एक बीघा जमीन एलडीए ने 1984 में अधिग्रहीत की थी। जिसका कब्जा भी उसने 1987 में ले लिया था।
इसी जमीन पर करीब डेढ़ दशक से विधायक का कब्जा है। मौके पर 15 दुकानें व दो मंदिर बने हुए हैं। दुकानों से किराया भी वसूला जा रहा है। यही नहीं एक सरकारी अस्पताल को किराए पर जगह दे दी गई है।
इनके अलावा करीब पांच महीना पहले कुछ और दुकान बनाए जाने का मामला समाने आया था। जिसको लेकर हो-हल्ला मचने के बाद उनका निर्माण बंद करा दिया गया था। इस संबंध में एक जनहित याचिका भी उच्च न्यायालय में दाखिल की गई है।
उनका कहना है जिस जमीन पर विधायक ने मकान और मार्केट बनवाई है वह एलडीए की है। इस जमीन को एलडीए ने भविष्य की योजनाओं के लिए आरक्षित कर रखा है।
जनसूचना अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में एलडीए ने यह जानकारी दी है। जिस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की थी।
इस प्रकरण में विधायक ने जमीन को अपनी बताते हुए अर्जन मुक्त करने के लिए जो दस्तावेज एलडीए में दिए हैं। उसमें उन्होंने उस व्यक्ति से इकरारनामा किए जाने का दस्तावेज भी पेश किया जो उस समय नाबालिग था।