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स्मारक घोटाले में फंसा राजस्थानी पेंच

विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 20 Jan 2014 12:58 PM IST
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स्मारक घोटाले की जांच कर रहे सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) को राजस्थान के एक व्यापारी की तलाश है।
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पूर्वमंत्री बाबूसिंह कुशवाहा के करीबी इस व्यापारी से विजिलेंस को कई सवालों के  जवाब चाहिए। स्मारकों के निर्माण की शुरुआत में ही राजनेताओं, अधिकारियों और ठेकेदारों का गठजोड़ प्रभाव में आ गया था।

राजनीतिक पहुंच वाले ठेकेदारों के दबाव और राजनेताओं की इच्छा के मुताबिक अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार कर चुनिंदा ठेकेदारों का कंसोर्टियम बना दिया और उसे करोड़ों-अरबों रुपये के काम दे दिए थे।
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विजिलेंस को जानकारी मिली है कि राजस्थान के एसएस मार्बल्स के ओपी व्यास की ठेकेदारों का कंसोर्टियम बनवाने में अहम भूमिका थी।

व्यास की पूर्व मंत्री बाबूसिंह कुशवाहा से नजदीकी होने की भी विजिलेंस को जानकारी मिली है।

इस ठेकेदार ने भी स्मारकों के निर्माण के संबंध में कुछ काम लिए थे, पर उसने कोई काम पूरा नहीं किया, बल्कि अपना काम दूसरे ठेकेदारों को सब-लेट कर कमीशन लेकर निकल गया।

विजिलेंस को इस ठेकेदार से स्मारकों के निर्माण में उसकी भूमिका, पूर्व मंत्री से रिश्ते, कंसोर्टियम के सदस्यों द्वारा दिए गए कमीशन आदि के बारे में पूछताछ करनी है।

विजिलेंस के सूत्रों का कहना है कि इस ठेकेदार का जो नंबर व पता मिला है, उसकी अभी तस्दीक नहीं हो सकी है। सही पता मिलने के बाद उसे पूछताछ के लिए बुलाने को नोटिस भेजा जाएगा।

विजिलेंस इस बीच कंसोर्टियम में शामिल कुछ और फर्मों के संचालकों की गतिविधियों पर नजर रख रही है।
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