एलडीए में किस तरह आवासीय भूखंडों को छिपाकर रखा जाता है, इसका बड़ा उदाहरण बसंतकुंज योजना में सामने आया है। यहां डेढ़ साल में 700 भूखंड एलडीए बेच चुका है।
अब जब फिर से तलाश हुई तो 155 भूखंड और निकल आए हैं। अब एलडीए इनके भी पंजीकरण खोलकर जल्दी ही आवंटन की प्रक्रिया शुरू करेगा। इन भूखंडों की कीमत करीब 62 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
एलडीए के ओएसडी रामशंकर ने इन भूखंड के उपलब्ध होने की सूचना अधिकारियों को भेजी है। वीसी और सचिव को भेजी गई सूचना में बताया गया है कि बसंतकुंज में 155 भूखंड की आवंटन की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
वहीं इनका भौतिक सत्यापन भी एक बार करा लिए जाने की मांग उन्होंने की है, जिससे भविष्य में विवाद की स्थिति नहीं बने।
इससे पहले एलडीए ने इसी साल फरवरी में 250 भूखंडों के पंजीकरण खोले थे। उस समय यही बताया गया था कि इतने ही भूखंड एलडीए की इस योजना में रिक्त हैं। इससे पहले एलडीए ने करीब 450 भूखंड के लिए आवंटन 2019 में खोला था। इनके आवंटन की प्रक्रिया भी एलडीए पूरी कर चुका है। एलडीए अधिकारियों का कहना है कि विकास कार्य अधूरा होने की वजह से भूखंडों के आवंटन के लिए उपलब्ध संख्या का सही आंकड़ा पता नहीं चल पाता है। एलडीए अब केवल उन भूखंडों को ही आवंटन के लिए पंजीकरण में लगाता है जिन पर कब्जा देने में दिक्कत नहीं आए।
जुलाई में खोले जा सकते हैं पंजीकरण
एलडीए के अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा के ओएसडी रामशंकर को भेजे गए पत्र के मुताबिक जुलाई में भूखंडों के लिए पंजीकरण खोले जा सकते हैं। एलडीए इसके लिए तैयारी कर रहा है। इस दौरान 40 व्यावसायिक भूखंडों की नीलामी से बसंतकुंज में बिक्री का काम भी शुरू हो गया है। जल्दी ही एलडीए इनके आरक्षण की प्रक्रिया को पूरा कर नीलामी में लगाएगा।