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अखिलेश सरकार ने बढ़ाई विभागों की ताकत

अनिल कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 23 Aug 2014 01:29 AM IST
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अब पांच करोड़ रुपये तक की वित्तीय स्वीकृतियां सीधे विभागाध्यक्ष जारी कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें वित्त विभाग की इजाजत नहीं लेनी होगी।
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वहीं किसी परियोजना के एस्टीमेट में दस फीसदी तक बढ़ोतरी होने पर उसकी मंजूरी भी विभागाध्यक्ष अपने स्तर से ही दे सकेंगे।

इनको मिले ये अधिकार
-पांच करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं के व्यय के प्रस्ताव का मूल्यांकन एवं औचित्य का परीक्षण प्रशासकीय विभाग करेगा।

-पांच करोड़ से अधिक एवं 25 करोड़ रुपये तक के प्रस्तावों का मूल्यांकन व औचित्य के परीक्षण का अधिकार उन प्रशासकीय विभागों को मिला है, जहां मुख्य अभियंता होंगे।

प्रशासकीय विभाग करेंगे मूल्यांकन व परीक्षण

-जिन विभागों में मुख्य अभियंता तैनात नहीं होंगे, वहां पांच करोड़ से अधिक व 25 करोड़ रुपये तक के प्रस्तावों का मूल्यांकन एवं परीक्षण पीएफ.एडी व प्रशासकीय विभाग करेंगे।

-25 करोड़ से अधिक के प्रस्तावों का मूल्यांकन व उनके औचित्य का परीक्षण पीएफ.एडी व प्रमुख सचिव वित्त की अध्यक्षता में गठित व्यय वित्त समिति करेगी।

10 फीसदी एस्टीमेट बढ़ाने का अधिकार विभागों को

-परियोजनाओं की लागत में 10 प्रतिशत तक पुनरीक्षण का अधिकार प्रशासकीय विभाग का होगा।
-10 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी होने पर परियोजनाओं का मूल्यांकन प्रायोजना रचना एवं मूल्यांकन प्रभाग (पीएफएडी) करेगा।

-50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि होने की दशा में पुनरीक्षित आगणन का परीक्षण व उस पर विचार व्यय वित्त समिति करेगी।
-हालांकि 25 करोड़ रुपये से अधिक के पुनरीक्षण से जुड़े समस्त प्रस्ताव व्यय वित्त समिति के विचार के लिए पेश किए जाएंगे।

-खर्च के ऐसे प्रस्तावों पर जिनमें केंद्र सरकार का अंश 50 प्रतिशत या इससे अधिक है, उनका परीक्षण पीएफ.एडी व व्यय वित्त समिति नहीं करेगी। ऐसे प्रस्तावों में भारत सरकार द्वारा जो केंद्रांश स्वीकृत किया जाएगा, उसी के सापेक्ष समानुपातिक रूप से राज्यांश की स्वीकृति दी जाएगी।

व्यय वित्त समिति में भी बदलाव

अध्यक्ष--प्रमुख सचिव या सचिव वित्त
सदस्य--प्रमुख सचिव अथवा सचिव नियोजन, पर्यावरण विभाग, परियोजना से जुड़े (प्रशासकीय) विभाग, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता अथवा उनके द्वारा नामित अधिकारी जो मुख्य अभियंता के स्तर से कम नहीं होगा।

संयोजक सदस्य--निदेशक, प्रायोजना रचना एवं मूल्यांकन प्रभाग, राज्य नियोजन संस्थान।
विशेष आमंत्रित- निर्माण एजेंसी के प्रबंध निदेशक या मुख्य अभियंता विशेष आमंत्रित सदस्य रहेंगे।
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