संसदीय कार्यमंत्री आजम खां ने कहा कि उनके नाम से फेसबुक पर फर्जी पोस्ट डालने का मामला सुप्रीम कोर्ट के फैसले की परिधि में नहीं है।
जिस युवक को नाबालिग बताया जा रहा है, वह बालिग है और छात्र भी नहीं है।
आजम ने नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा बरेली के लड़के की गिरफ्तारी का मामला उठाने पर कहा कि उसकी हिमायत उचित नहीं है।
सोशल मीडिया के गुनाह से मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जले। बरेली के लड़के को माफ करते तो पता नहीं क्या-क्या जल जाते।
उन्होंने रामपुर और बरेली में कार्रवाई के मामलों को सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बाद सोशल मीडिया पर उनसे जोड़कर देखा जा रहा है।
सभी जानते हैं कि उन्होंने सख्त कार्रवाई कराई तो सोशल मीडिया पर ओछे कमेंट्स में कमी आई है। अभिव्यक्ति की आजादी इंसान का अधिकार है लेकिन दूसरे की आजादी को छीनने का अधिकार कानून नहीं देता।