लखनऊ और हाथरस में छात्रवृत्ति योजना में एक और बड़ा घपला सामने आया है। ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम पॉलीटेक्निक-यूपी(जीकप), आयुर्वेदिक और यूनानी बोर्ड की राज्यस्तरीय परीक्षाओं में शामिल न होने वाले छात्रों को भी भुगतान कर दिया गया। जबकि, नियमानुसार इन विद्यार्थियों को न तो छात्रवृत्ति दी जा सकती थी और न ही शुल्क ही भरपाई हो सकती थी।
विभागीय सूत्रों से अमर उजाला को मिले गोपनीय इनपुट के अनुसार, लखनऊ के दो फार्मेसी कॉलेज और एक फार्मेसी एंड साइंस इंस्टीट्यूट में ये गड़बड़ियां की गई हैं। वर्ष 2019-20 में अनुसूचित जाति के ऐसे छात्रों से ऑनलाइन आवेदन कराया गया, जो राज्य स्तर स्तर पर होने वाली जीकप, आयुर्वेदिक और यूनानी बोर्ड की परीक्षा में शामिल नहीं हुए थे।
नियमानुसार, वे छात्रवृत्ति और शुल्क पाने के पात्र नहीं थे। इन्हीं संस्थानों ने यही सिलसिला वर्ष 2020-21 में भी जारी रखा। इन छात्रों को भुगतान भी किया गया। इन मामलों में प्रथम दृष्टया कॉलेज प्रबंधन के साथ-साथ समाज कल्याण विभाग के कार्मिकों को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
इसी तरह से इन दोनों वर्षों में हाथरस में भी ये गड़बड़ियां की गईं। आयुष नर्सिंग और फार्मेसी संस्थानों में अनुसूचित जाति के ही अपात्र छात्रों को योजना का लाभ दिया गया। हाथरस जिले में अभी तक तीन संस्थानों में ये घपले सामने आ चुके हैं। हालांकि, इनके खिलाफ अभी तक समाज कल्याण विभाग के स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
वहीं, सूत्रों का कहना है कि अगर प्रदेश में ये पाठ्यक्रम चला रहे अन्य संस्थानों की भी जांच करा ली जाए तो और भी बड़े घपले सामने आने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। इस बारे में संपर्क किए जाने पर प्रमुख सचिव, समाज कल्याण के. रविंद्र नायक ने कहा कि मामलों की जांच कराकर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।