पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मोहर सिंह से पूछताछ में कई अहम जानकारियां हाथ मिली हैं जिसमें गिरधारी व अजीत के बीच साथ रहने को लेकर दो महीने तक चले संवाद की भी बात सामने आई। इस बात की पुष्टि भी मोहर ने की। अजीत के करीबियों के मुताबिक, गिरधारी ने जब उनसे संपर्क किया तो अजीत ने अपराध जगत छोड़ने की बात कहकर टाल दिया। इसके बाद भी गिरधारी ने पीछा नहीं छोड़ा। मोहर को उसका अजीत से मिलना खटकने लगा। मोहर के कहने पर अजीत ने कुंटू से साफ मना कर दिया।
सुपारी किलर ने खड़ा कर लिया था करोड़ों का साम्राज्य
अजीत सिंह करीब डेढ़ दशक पहले सुपारी पर हत्याएं करता था। अजीत पर पहला मुकदमा 2003 में दर्ज हुआ था। उसने 2008 में 20 हजार रुपये की सुपारी लेकर एक अपहरण को अंजाम दिया था। इसी रकम से यामाहा बाइक खरीदी। पहली हत्या 2009 में की थी। एक साल बाद उसने फिर से हत्या की। इस हत्याकांड के बाद पूरे इलाके में अजीत की धमक बन गई। उस पर कई केस दर्ज हुए। पुलिस ने उसके खिलाफ कई बार गैंगस्टर की कार्रवाई की। 2020 दिसंबर में जिला प्रशासन ने उसे जिला बदर करने का आदेश दिया।
इसी दौरान अजीत ने अपना रुख व्यापार की तरफ कर लिया। धीरे-धीरे आजमगढ़ और मऊ में कई शराब की दुकानों का लाइसेंस भी हासिल कर लिया। फिर उसने लखनऊ का रुख किया जहां कुछ प्रॉपर्टी डीलरों के साथ मिलकर कारोबार करने लगा। इनमें ज्यादातर प्रॉपर्टी डीलर पूर्वांचल से ही जुड़े थे। अजीत के जुड़ने से उनको संरक्षण भी मिला और कारोबार में रकम फंसने पर किसानों को धमकाने का एक जरिया भी। धीरे-धीरे बाइक से चलने वाला सुपारी किलर करोड़ों के कारोबार का मालिक हो गया। उसने बुलेटप्रूफ गाड़ियों का काफिला खड़ा कर लिया।