बलरामपुर अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बुजुर्ग को अजीबोगरीब बीमारी से निजात दिला दी है। 20 साल पहले बुरी तरह झुलसे मरीज की नाभि और सीने की हड्डी के बीच काले रंग की सींग जैसी आकृति निकल आई थी।
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मरीज अस्पताल पहुंचा तो इसे देख डॉक्टर भी हैरान रह गये। डेढ़ घंटे चली सर्जरी के बाद तीन इंच की आकृति को बाहर निकाल दिया गया। अब इसे बायोप्सी के लिए लोहिया संस्थान भेजा गया है।
बाराबंकी, बाबागंज के मो. बैश (62) करीब बीस साल पहले आग की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गये थे। कई महीने से पेट और सीने की हड्डी के बीच में काले रंग की एक नुकीली सींग जैसी आकृति डवलप होने लगी।
मोटाई थी करीब ढाई इंच
- फोटो : amar ujala
परिवारीजन मो. बैश को लेकर बलरामपुर अस्पताल पहुंचे। जहां सीएमएस और सर्जन डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि मरीज के पेट और सीने की हड्डी र्स्टनम के बीच सींग जैसा कुछ निकला हुआ था। एक्स-रे और सीटी स्कैन से पता चला कि यह अंदर तक है।
शनिवार को करीब पांच इंच का चीरा लगाकर तीन इंच लम्बी नुकीली सींग को निकाल दिया गया इसकी मोटाई करीब ढाई इंच थी। डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि सींग निकलने के दो कारण हो सकते हैं।
पहला स्टेम सेल कारसीनोमा और दूसरा सेबेस्टियस हॉर्न, जो बर्न के मरीजों में कभी कभार मिलता है।
तीन घंटे में हुई सर्जरी
डॉ. राजीव लोचन व डॉ. ऋषि सक्सेना
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मरीज के पेट से करीब तीन इंच की फॉरेन बॉडी निकालने में डेढ़ घंटे लगे अब वह पूरी तरह ठीक है। सर्जरी टीम में डॉ. राजीव लोचन के साथ डॉ. राजीव, डॉ. अतुल, डॉ. कौशल और डॉ. पीयूष समेत नर्सिंग स्टाफ मंजू मौजूद रहे।
जांघ की खाल से की प्लास्टिक सर्जरी
डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि फॉरेन बॉडी ‘सींग’ निकालने के लिए उस हिस्से में कट लगाया गया। उस हिस्से को रिपेयर करने के लिए जांघ की खाल लगाई गई।
डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि जख्म की प्लास्टिक सर्जरी करने के बाद अब ये नहीं पता लगेगा की कोई फॉरेन बॉडी उस हिस्से में थी। निजी संस्थान में इस ऑपरेशन के लिए मरीज को 50 हजार रुपये से ज्यादा खर्च करना पड़ता। अस्पताल में एक रुपये के पर्चे पर पूरा इलाज हुआ।