पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पीडीपी और भाजपा के एजेंडा आफ अलायंस पर सवालिया निशान खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को बताना चाहिए कि इस एजेंडे से रियासत को उन्होंने क्या दिया।
और पढ़ें
उमर ने कहा कि सरकार कोई एक काम नहीं बता सकती जो एजेंडा आफ अलायंस की उपलब्धि हो। एजेंडा के बिन्दुओं पर किसी को कोई एतराज नहीं है बल्कि अब इसके क्रियान्वयन नहीं होने पर आपत्ति है। भाजपा से गठबंधन के पहले श्रीनगर के सैलाब पीड़ितों के राहत की बात की गई थी लेकिन सरकार इस मोर्चे पर फेल हो गई।
उन्होंने कहा कि एजंडा के तहत पावर प्रोजेक्टों की वापसी की बात हुई थी लेकिन एनएचपीसी ने साफ कर दिया है कि प्रोजेक्ट वापस नहीं करेंगे। सरकार एजेंडा लागू नहीं कर पा रही है। अगर एजेंडा लागू होता तो कश्मीर में छह महीने तक हालात खराब नहीं रहते। चुनाव प्रचार के दौरान नरेन्द्र मोदी कहते थे कि तत्कालीन केंद्र सरकार मर जवान, मर किसान के सिद्धांत पर चल रही है। अब क्या हो रहा है।
कश्मीर को आईआईटी और आईआईएम क्यों नहीं
एजेंडा आफ अलायंस के क्षेत्रीय संतुलन के वादे पर सवाल करते हुए उमर ने कहा कि जब श्रीनगर के लिए एम्स की बात हुई तो जम्मू में विरोध में आंदोलन हो गया। केंद्र ने जम्मू को भी एम्स दे दिया। अब जम्मू को आईआईटी और आईआईएम मिला है तो कश्मीर को क्यों नहीं? क्या क्षेत्रीय संतुलन के सिद्धांत के तहत कश्मीर के लिए ऐसा नहीं किया जाना चाहिए था। चिनाब वेली और लेह -लद्दाख जैसे क्षेत्र भी पीछे छूट रहे हैं।
स्वास्थ्य महकमे में 2100 अनमेच्योरड ट्रांसफर
जम्मू-कश्मीर विधानसभा
- फोटो : AMAR UJALA
उमर ने कहा कि स्वास्थ्य महकमे में 2100 अनमेच्योरड ट्रांसफर हुए हैं। हर रोज द-तीन ट्रांशपर हो रहे हैं। दूरदराज से डाक्टरों को लाकर जम्मू के गांधीनगर, सांबा और विजयपुर में बैठा दिया और दूरदराज में किसी को नहीं भेजा। एक बीडीओ का 18 महीने में 12 बार और दूसरे का 5 बार ट्रांसफर हुआ। एमएलए एक बीडीओ से योजना पर बात करते हैं और दूसरे दिन पता चलता है कि उसका ट्रांसफर हो गया। ऐसे में विकास योजनाएं कैसे चलेंगी?
चीफ सेक्रेटरी के तबादले पर हर रोज चर्चा
उमर ने कहा कि चीफ सेक्रेटरी को पता नहीं कि वे कबतक हैं। हर रोज उनके बदले जाने की चर्चा होती है। उन्हें भाजपा-पीडीपी सरकार ने ही बनाया है। मुख्यमंत्री के दो बाजू होते हैं। डीजीपी और चीफ सेक्रेटरी। किसी भी बात पर इन दोनों से ही पहले पूछा जाता है। लेकिन चीफ सेक्रेटरी को जबतक यह नहीं लगेगा कि वे पद पर स्थिर हैं तबतक दूसरों से काम कैसे ले पाएंगे। उन्होंने सीएम को सलाह दी कि उन अफसरों को समझाइए जो चीफ सेक्रेटरी की दौड़ में हैं और अपने साथियों को भी समझाइए।
सूचना का अधिकार लोगों को नहीं मिला
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि एमएलए की पूछ नहीं रह गई है। सत्तापक्ष के भी कई विधायकों की भी यही शिकायत है। थर्ड पार्टी मानिटरिंग बंद कर दी गई है। जनता को बताएं कि किस मंत्री का प्रदश4न कैसा है। मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति नहीं हुई। सूचना का अधिकार लोगों को नहीं मिला। जब सूचनाएं ही नहीं मिलेंगीं तो आम लोग विजलेंस में शिकायत कैसे करेंगे। इन संस्थाओं को तवज्जो देने की जरुरत है।
लोकल और बाहरी अफसरों को लड़ाएं नहीं
उन्होंने कहा कि निजाम में लोकल और बाहरी अफसरों का मामला चलने लगा है। कैडर मैनेजमेंट की बात कही गई थी लेकिन उलटा हो रहा है। कोई डिपार्टमेंट नहीं है जिसमें बड़ी संख्या में पद खाली नहीं हों। सरकार को बताना चाहिए कि फास्ट ट्रैक पालिसी के तहत कितनी भर्तियां हुईं। विपक्ष को आग लगाने वाले लोग कहा जाने लगा है। आग हम नहीं लगाते बल्कि हुकूमत लगाती है।