करीब 19 साल पहले 13 मई 1998 को राजस्थान के पोकरण में हुए ऐतिहासिक परमाणु परीक्षण की कहानी एक बार फिर से दोहराई जाएगी। इस बार ये परीक्षण असल में नहीं, बल्कि फिल्मी पर्दे पर दिखाई देगा।
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दुनिया को हिला कर रख देने वाले देश के इस सबसे सफल और खुफिया परमाणु परीक्षण पर बनने वाली फिल्म का नाम होगा 'परमाणु द स्टोरी आॅफ पोकरण'। इसे 'तेरे बिन लादेन' जैसी हिट फिल्म बनाने वाले डायरेक्टर अभिषेक शर्मा बनाएंगे। फिल्म की शूटिंग 14 जून से जैसलमेर के पोकरण में शुरु होगी।
जानकारी के अनुसार बॉलीवुड अभिनेता जॉन अब्राहम और एक्ट्रेस डायना पेंटी फिल्म के लीड किरदार में होंगे, जबकि बोमन ईरानी की भूमिका भी खास होगी। फिल्म की पटकथा को साइविन काद्रोस और संयुक्त चावला ने तैयार किया है। इससे पहले इन दोनों राइटर्स ने फिल्म 'नीरजा' की कहानी भी लिखी थी।
फिल्म की पूरी स्टार कास्ट के बारे में फिलहाल खुलास नहीं किया गया है। फिल्म के प्रोड्यूसर्स का कहना है कि फिल्म पूरी तरह से देश के इस सबसे बड़े खुफिया मिशन की कहानी आम लोगों तक पहुंचेगी।
इस फिल्म के कुछ हिस्सों की शूटिंग दिल्ली और मुंबई में शूट किए जा चुके हैं और अब पोकरण में फिल्म के बाकि हिस्सों की शूटिंग 14 से 23 जून तक पोकरण के गांधी चौक,आड़ा बाजार,पोकरण फोर्ट,मुख्य बाजार और आरटीडीसी के मिड-वे पर फिल्माए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों से शूट के लिए परमिशन ली जा चुकी है।
जब दुनिया के नक्शे पर पहचाना जाने लगा था पोकरण!!! पढ़िए पूरी कहानी
सरकार द्वारा जारी की गई थार में एक टेस्ट साइट की एक दुर्लभ तस्वीर
- फोटो : Internet
भारत ने बिल्कुल ही गुप्त तरीके से राजस्थान सुदूर रेगिस्तानी इलाके पोकरण में 11 मई 1998 को परमाणु परीक्षण किया था जिसके बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया था। इस दौरान भारत ने कुल पांच परीक्षण किए थे। परीक्षण के कुछ दिन बाद भारत सरकार ने 17 मई 1998 को वीडियो तस्वीरें रिलीज की थी। ये उस समय की है जब भूमिगत परमाणु परीक्षण हुआ था।
पोकरण परमाणु परीक्षण के बाद परमाणु ऊर्जा विभाग के तत्कालीन प्रमुख आर.चिदंबरम और प्रधानमंत्री के तत्कालीन वैज्ञानिक सलाहकार अब्दुल कलाम ने 17 मई 1998 को दिल्ली में पत्रकार वार्ता की थी।
11 मई 1998 के परमाणु परीक्षण के बाद उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपयी 20 मई को पोकरण आए थे जहाँ कुछ दिन पहले टेस्ट किया गया था।
परमाणु परीक्षण करने के लिए भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा हुई थी।