कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ की डील मामले में वाड्रा के खिलाफ बोलने वाले गुड़गांव से कांग्रेस सांसद राव इंद्रजीत सिंह इसी सप्ताह कांग्रेस को अलविदा कह सकते हैं।
उनके नजदीकी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस में अब उनके सिर्फ तीन दिन बकाया हैं। इंद्रजीत हरियाणा में अन्य सीएलयू की जांच कराने की मांग भी करते रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार दक्षिण हरियाणा के साथ विकास कार्यों और नौकरियों में भेदभाव का आरोप लगाकर दो साल से मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले राव इंद्रजीत सिंह की पटरी अब कांग्रेस में बैठने वाली नहीं है। उन्होंने अलग रास्ता तय करने का फैसला कर लिया है।
सूत्रों के मुताबिक राव इंद्रजीत सिंह इसी सप्ताह चंडीगढ़ में राजनीतिक संगठन की घोषणा कर सकते हैं।
हुड्डा के खिलाफ बोलने पर नहीं थी आपत्ति
राव इंद्रजीत ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ आंदोलन छेड़ रखा है। उनके इस रुख पर अब तक कांग्रेस खामोश थी।
लेकिन रॉबर्ट वाड्रा से संबंधित जमीन सौदे के मामले में सीबीआई जांच की वकालत करते ही कांग्रेस के बागी सांसद राव इंद्रजीत सिंह पर पार्टी के हमले तेज हो गए हैं। उनकी घेराबंदी के लिए गुड़गांव संसदीय क्षेत्र के अलावा हरियाणा के अहीरवाल क्षेत्र के कई विधायकों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को लगाया गया है।
विधायकों का इंद्रजीत पर आरोप है कि सांसद ने रेवाड़ी में नारनौल रोड स्थित राव गोपाल देव चौक पर लगभग 50 एकड़ निजीभूमि पर अवैध कॉलोनी काटी है। राज्य सरकार ने जब इसे लेकर कार्रवाई की तो वे सरकार के खिलाफ बयानबाजी पर उतर आए।
इन नेताओं ने सवाल उठाया कि वे बताएं कि अवैध कॉलोनी काटने के मामले में संलिप्त हैं या नहीं? विधायकों का यह भी आरोप है कि इंद्रजीत ने यूनिटेक के साथ मिलकर लगभग 70 एकड़ भूमि का सीएलयू लिया है।
वाड्रा के खिलाफ राव ने क्या कहा
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा से संबंधित जमीन सौदा मामले में राव इंद्रजीत के बयान से पार्टी के अंदर भी विरोध शुरू हो गया है।
इंद्रजीत ने सच्चाई सामने लाने के लिए इस सौदे की सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा है कि वाड्रा कानून से ऊपर नहीं हैं।
बीरेंद्र ने राव की राह अपनाई
सांसद राव इंद्रजीत दो साल से क्षेत्रवाद का आरोप लगा रहे थे तब राज्यसभा सदस्य चौधरी बीरेंद्र सिंह चुप थे। मगर जब उन्हें कांग्रेस महासचिव पद से हटा दिया गया और केंद्र में भी मंत्री नहीं बन पाए तो उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर उत्तर हरियाणा के साथ भेदभाव का आरोप लगाना शुरू कर दिया।
कैबिनेट मंत्री कुमारी सैलजा, राज्यसभा सदस्य ईश्वर सिंह, कुमारी सैलजा के समर्थक दो विधायक राजपाल भूखड़ी और नरेश सेलवाल ने भी उनके क्षेत्रों के साथ भेदभाव के आरोप लगा दिए।