ऊर्जा निगम के कार्मिक पिछले 4 सालों से एसीपी की पुरानी व्यवस्था तथा उपनल के माध्यम से कार्य कार्योजित कार्मिकों के नियमितीकरण एवं समान कार्य हेतु समान वेतन को लेकर लगातार सरकार से वार्ता कर रहे हैं। 22 दिसंबर 2017 को कार्मिकों के संगठनों तथा सरकार के बीच द्विपक्षीय समझौता हुआ परंतु आज तक उस समझौते पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। ऊर्जा निगम के कार्मिक इस बात से क्षुब्ध हैं कि सातवें वेतन आयोग में उनकी पुरानी चली आ रही 9-5-5 की एसीपी व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है, जो कि उन्हें उत्तर प्रदेश के समय से ही मिल रही थी। यही नहीं पे मैट्रिक्स में भी काफी छेड़खानी की गई। संविदा कार्मिकों को समान कार्य समान वेतन के विषय में कोई कार्यवाही नहीं हुई। इसके अतिरिक्त ऊर्जा निगमों में इंसेंटिव एलाउंसेस का रिवीजन नहीं हुआ।
विधायक कपूर से मिले स्वयं सहायता समूह बिजली कर्मचारी
स्वयं सहायता समूह (एसएचजी उपभोक्ता सेवा समिति) के विद्युत कर्मचारियों ने विधायक हरबंस कपूर से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि विभाग को काफी लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बहुत ही कम वेतन मिलता है, जिसमें आज के महंगाई के दौर में गुजारा करना मुश्किल हो गया है। बिजली विभाग का कोई अधिकारी उनकी सुध लेने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि कई कर्मचारी काम के दौरान अपनी जान गवां चुके हैं, उनके परिजनों को भी उचित मुआवजा नहीं दिया जाता है। दिन रात सेवा दे रहे कर्मियों को अवकाश की भी सुविधा नहीं है। न ही ओवर टाइम दिया जाता है। कर्मचारियों ने विधायक से मांग की कि उनकी समस्याओं को वह सरकार तक पहुंचाएं। इस दौरान विनोद कुमार, निशिकांत सोनकर, रवि ध्यानी, विकास कुमार, विजय कुमार, अनादि उप्रेती, मधु सूधन, सुरेश चौधरी, अमित कुमार, दिनेश, छोटे लाल, मनीष आदि मौजूद रहे।
रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने दिया समर्थन
उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन की प्रांतीय कार्यकारिणी ने ऊर्जा निगम कर्मियों के आंदोलन को समर्थन दे दिया है। यूनियन के प्रांतीय महामंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि ऊर्जा कर्मियों की 14 सूत्री मांगों का अध्ययन किया गया। यह पाया गया कि यह सभी मांगें बिल्कुल सही हैं। लिहाजा, उन्होंने भी बिजलीकर्मियों की हड़ताल को समर्थन दे दिया है। उन्होंने उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा को समर्थन संबंधी पत्र भेजा।
ऊर्जा निगम कर्मियों की हड़ताल से आमजन सुबह से देर रात तक बिजली के लिए तो तरसे ही, साथ ही पानी के लिए भी परेशान होना पड़ा। बिजली न होने के कारण जलसंस्थान और जल निगम के ट्यूबवेल नहीं चल पाए। इससे शहरी क्षेत्र के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी पानी की सप्लाई ठप हो गई। ऊर्जा कर्मियों की पूर्व घोषित हड़ताल के बाद भी जल संस्थान और जल निगम ने पानी की आपूर्ति के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की।
दरअसल, जल संस्थान और जल निगम के तमाम ट्यूबवेल ऊर्जा निगम के भरोसे चलते हैं। अधिकांश ट्यूबवेलों में जनरेटर की व्यवस्था नहीं है। वहीं, सोमवार देर रात से ऊर्जा निगम कर्मियों ने हड़ताल शुरू कर दी, जिसका सीधा असर पानी की सप्लाई पर भी पड़ा। बिजली नहीं होने से जलसंस्थान और जल निगम के ट्यूबवेल नहीं चल पाए। पानी की आपूर्ति न होने के कारण लोगों परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों ने किसी तरह से हैंडपंपों आदि के माध्यम से काम चलाया। देर रात तक भी बिजली आपूर्ति सूचारु नहीं हो पाई थी।
इन क्षेत्रों में रही ज्यादा दिक्कत
शहरी क्षेत्र के घंटाघर, दिलाराम चौक, सुभाष रोड, डालनवाला, करनपुर, रायपुर रोड, नेहरू कॉलोनी क्षेत्र खुड़बुड़ा क्षेत्र, आरकेड़िया के प्रेमनगर, श्यामपुर,शुक्लापुर, बनियावाला, बड़ोवाला, अंबीबाला, मेेंहूवाला, नयागांव, माजरा, आईएसबीटी, क्लेमेनटाउन सहित कई क्षेत्रों में ज्यादा दिक्कत रही।
आज भी हो सकती है दिक्कत
देर रात तक भी राजधानी के कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सुचारु नहीं हो पाई थी। लिहाजा ट्यूबवेल भी ठप रहे। इससे जलसंस्थान और जल निगम के ओवरहैड टैंक नहीं भर पाएंगे। इससे बुधवार को पेयजल की सप्लाई में दिक्कत होगी और लोगों को पानी के लिए तरसना पड़ेगा।