उत्तरकाशी में गंगोत्री हाईवे पर धरासू नालूपाणी में चलती बस पर पहाड़ी से भारी बोल्डर आ गिरा। ड्राइवर और बस में सवार पीआरडी जवानों ने भाग कर जान बचाई। कुछ जवानों को चोटें भी आई है।
और पढ़ें
बुधवार दोपहर दो बजे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव ड्यूटी से 42 पीआरडी जवानों से भरी बस नौगांव से लौट रही थी, तभी धरासू नालूपाणी के पास बस पर पहाड़ी से पत्थरों की बरसात शुरू हो गई।
चालक जब तक बस को निकालने की कोशिश करता, तब तक बड़े पत्थरों ने रास्ता अवरुद्ध कर दिया। ऐसे में चालक और जवानों ने खिड़की-दरवाजे के रास्ते कूद कर जान बचाई।
इस दौरान आगे की सीटों पर बैठे कई जवानों को हल्की चोटें भी आई है। हादसे में बस के शीशे टूटने के साथ ही काफी हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।
पत्थर गिरने का सिलसिला थमने पर किसी तरह पत्थर हटाकर बस को वहां से निकाला गया। तब करीब आधे घंटे बाद हाईवे पर यातायात सुचारु हो पाया।
केदारघाटी का निरीक्षण करने आए संयुक्त सचिव
केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव जीवीवी शर्मा केदारनाथ धाम और जिले का दौरा कर लौट गए हैं।
अपने दो दिवसीय भ्रमण में उन्होंने केदारनाथ आपदा के बाद कराए जा रहे पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा करने के साथ ही स्थलीय निरीक्षण किया।
सोमवार को केदारघाटी में पुनर्निर्माण और पुनर्वास कार्यों का निरीक्षण करने के बाद संयुक्त सचिव मंगलवार को केदारनाथ पहुंचे।
यहां उन्होंने केदारनाथ मंदिर के पीछे निम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) उत्तरकाशी द्वारा कराए जा रहे मंदाकिनी और सरस्वती नदी के डायवर्जन और सुरक्षा दीवार निर्माण कार्य को देखा।
प्रलय में बहकर आए पत्थरों को तोड़ने से किया मना
उन्होंने केदारनाथ मंदिर के पीछे जलप्रलय में बहकर आए पत्थरों को तोड़ने से मना किया।
उन्होंने कहा कि आपदा के बाद जो चीज जैसी है, वैसे ही रहने दी जाए। इसको छेड़कर नुकसान बढ़ सकता है।
निरीक्षण के बाद संयुक्त सचिव ने अधिकारियों के साथ निर्माण कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान डीएम डॉ. राघव लंगर ने उनको अब तक कराए गए कार्यों की जानकारी दी।
मालूम हो कि गत वर्ष आई आपदा से उबरने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग की सहायता से उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी प्रोग्राम चल रहा है। इसी के तहत संयुक्त सचिव ने कार्यों का निरीक्षण किया।
बारिशों ने और धीमी की यात्रा की रफ्तार
पवित्र धामों में हर रोज औसतन करीब 17 सौ यात्री दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही बरसात के कारण यात्रा की रफ्तार भी धीमी हो गई है।
बीते वर्ष आपदा से सर्वाधिक प्रभावित केदारनाथ धाम में इस बार सबसे कम 26,346 यात्री ही पहुंच पाए हैं। 2014 की ग्रीष्मकालीन चारधाम यात्रा को दो माह होने को हैं, मगर यात्रा की गति में अभी तक तेजी नहीं आई है।
23 जून तक इस बार केवल 1,79,484 यात्री ही चारों धामों के दर्शन कर पाए हैं, जबकि बीते वर्ष आपदा से पहले (16/17 जून) ही करीब 13 लाख यात्री चारों धामों में पहुंच चुके थे।
इस बार मई में करीब एक लाख जबकि, जून में अभी तक 79 हजार यात्री ही धामों के दर्शन कर पाए हैं। इसमें बदरीनाथ पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सबसे अधिक है।
धाम में अभी तक 91,778 श्रद्धालु मत्था टेक चुके हैं, जबकि गंगोत्री और यमुनोत्री में क्रमश: 33,892 और 27,390 यात्रियों ने ही दर्शन किए हैं।
चारधाम यात्रा की स्थिति
दिनांक - चारधाम
जून 19- 2451
जून 20- 1990
जून 21- 1783
जून 22- 1775
जून 23- 1751
(स्रोत: यात्रा प्रशासन संगठन)
हेमकुंड यात्रा की गति भी धीमी
हेमकुंड यात्रा के लिए यात्रियों में उत्साह तो काफी है, मगर दैवी आपदा के कारण इस बार सिख भक्तों की संख्या में काफी कमी आई है।
बीते वर्षों की तुलना में कम यात्री पवित्र धाम के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। यात्रा को करीब एक माह हो गया है। चारधाम यात्रा प्रशासन संगठन के मुताबिक एक माह में केवल 20,143 यात्री ही श्री हेमकुंड साहिब पहुंच पाए हैं।