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केदारनाथ मंदिर के फर्श पर 'झगड़ा', पढ़ें पूरा मामला

ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 12 Mar 2015 01:59 PM IST
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बाबा केदारनाथ के मंदिर को लेकर फिर विवाद सामने आया है। इस बार मंदिर के फर्श को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और बदरी-केदार मंदिर समिति के बीच ‘सहमति’ बाधा बनी है।
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एएसआई ने ग्रेनाइट के फर्श के चिकने होने का हवाला देते हुए समिति को फर्श लकड़ी का बनाए जाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन समिति इस पर तैयार नहीं। लिहाजा, यहां फर्श नहीं डाला जा सका। केवल पत्थरों को ही सेट किया गया है।

एएसआई तापमान नियंत्रण और फिसलन की दृष्टि से लकड़ी के फर्श को सुरक्षित मानकर इसका फर्श तैयार करने का प्रस्ताव दे रहा था। इसे मंदिर समिति ने पूजा के दौरान प्रयोग होने वाली सामग्री से इसे नुकसान पहुंचने और अग्नि के प्रति संवेदनशील होने की वजह से नहीं माना।
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एएसआई ने इसी तरह की दिक्कतें देखते हुए मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) की बात उठाई है, ताकि प्रत्येक कार्य पर स्थिति साफ हो सके।

इसलिए जरूरी है मंदिर समिति की सहमति

एएसआई संरक्षित मंदिर न होने की वजह से समिति को साथ लेना एएसआई के लिए आवश्यक है।

इससे पूर्व 2003 में एएसआई इसके संरक्षण के संबंध में प्रयास कर चुकी है, लेकिन वह कवायद परवान नहीं चढ़ सकी। इससे जिन कामों को एएसआई अपने स्तर पर करा सकती थी, उसके लिए समिति की सहमति जरूरी है।

मंदिर समिति से कोई बड़ा मतभेद नहीं। कई बातें मौखिक सहमति से हो रही हैं। एमओयू बन जाए तो उसमें और स्पष्टता आ जाएगी। फिलहाल, केदारनाथ मंदिर में मौसम की वजह से काम बंद है। मंदिर के कपाट खुलने के बाद मई में एक बार फिर यहां काम शुरू किया जाएगा। पत्थरों को री-सेट किया जाएगा।
- वसंत स्वर्णकार, अधीक्षण पुरातत्वविद्, एएसआई दून सर्किल

मंदिर में हो रहे कार्य के संबंध में बार-बार एमओयू की बात आ रही है। यह बात मेरे संज्ञान में नहीं। समिति के किसी अन्य अधिकारी से बात हुई है तो कहा नहीं जा सकता। मतभेद भी कोई नहीं। केवल लकड़ी का फर्श बनाने को लेकर बात उठी थी। हमने अपना पक्ष बता दिया है।
- गणेश गोदियाल, अध्यक्ष, बदरी-केदार मंदिर समिति
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